'इस्लामिक स्टेट भी अल-क़ायदा की राह पर'

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राजनीतिक विश्लेषक मुक़्तदर ख़ान कहते हैं कि इस्लामिक स्टेट के पास क़रीब 15 बंधक हो सकते हैं. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि सीरिया से ग़ायब होने वाले लोग सीरिया की सरकार और अन्य चरमपंथी संगठनों के पास भी हो सकते हैं.

आईएस की तरफ़ से एक ब्रितानी नागरिक डेविड हेंस के क़त्ल का वीडियो जारी किया गया है.

इसके पीछे इस्लामिक स्टेट की रणनीति चेतावनी देकर पश्चिमी देशों के गठजोड़ को तोड़ने की कोशिश करना है.

मुक़्तदर ख़ान कहते हैं कि आईएस का मक़सद पश्चिमी देशों में युद्ध के ख़िलाफ़़ जनमत तैयार करना है.

ताकि अमरीका और पश्चिमी देश उसके ख़िलाफ़ लड़ाई से पीछे हट जाएं और आईएस सीरिया और इराक़ में विस्तार के अपने मक़सद में कामयाब हो सके.

जानने के लिए विस्तार से पढ़िए मुक़्तदर ख़ान का विश्लेषण.

इस्लामिक स्टेट चेतावनी की रणनीति से पश्चिमी देशों के गठजोड़ को तोड़ने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वो अपने मक़सद में कामयाब होगा.

क्योंकि 9/11 की बरसी के अवसर पर अमरीका में ऐसे गुटों के साथ सख़्ती से पेश आने की बात हुई.

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वहीं अमरीका की जनता चाहती है कि राष्ट्रपति ओबामा इस्लामिक स्टेट के साथ ज़्यादा सख़्ती से पेश आएं.

इसलिए अभी ऐसा नहीं है कि इस्लामिक स्टेट अमरीकी हवाई हमले या ब्रिटेन का अमरीका को जो सपोर्ट है उसे ख़त्म कर सकता है.

हो रहा है रणनीति का असर?

लेकिन आईएस की इस रणनीति का असर हो रहा है. अमरीकी विदेशमंत्री जॉन केरी ने पिछले दौरे पर मध्य पूर्व में एक गठजोड़ क़ायम किया है, जिसमें दस अरब देश शामिल हैं.

लेकिन इसमें तुर्की की बहुत ज़्यादा भूमिका नहीं है. इसकी वजह यह है कि आईएस ने मोसूल के पास तुर्की के वाणिज्य दूतावास के तक़रीबन 49 लोगों को बंधक बनाया हुआ है.

इसलिए तुर्की ऐसा कोई क़दम नहीं उठाना चाहता जिससे कि इस्लामिक स्टेट सभी 49 बंधकों का इसी तरीके से क़त्ल कर दे.

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तुर्की जैसे मुल्कों पर इसका असर पड़ रहा है. लेकिन अमरीका या ब्रिटेन पर अभी इस तरह का असर नहीं होगा.

लेकिन इस्लामिक स्टेट के पास अगर बंधकों की संख्या ज़्यादा होती है तो शायद कोई बात हो सकती है.

अमरीकी हवाई हमले से नुक़सान

अमरीका के हवाई हमले से इस्लामिक स्टेट को काफ़ी नुक़सान हो रहा है.

मिसाल के तौर पर उनका अभियान रुक गया है और वे अभी अपना विस्तार नहीं कर रहे हैं.

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वे अपने क़ब्ज़े वाले इलाक़ों पर नियंत्रण बनाए हुए हैं.

अमरीका के हवाई हमलों के पहले इस्लामिक स्टेट बग़दाद की तरफ़ बढ़ रहा था और लोगों को डर था कि शायद बग़दाद इस्लामिक स्टेट के हाथ चला जाएगा.

यह भी हो सकता है कि आईएस इस तरह की चरमपंथी घटनाओं के ज़रिए चाहता हो कि अमरीका ज़मीनी लड़ाई के लिए अपने सैनिक भेजे.

अलक़ायदा की राह पर आईएस

सोमालिया के ज़माने से अल-क़ायदा वग़ैरह की रणनीति रही है कि अमरीकी सैनिकों और नागरिकों को अगर मारें तो अमरीका इस क्षेत्र से पीछे हट जाएगा.

इस्लामिक स्टेट भी वही रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है.

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अगर हताहतों की संख्या इतनी ज़्यादा हो जाए कि पश्चिम में लोगों का पब्लिक ओपीनियन इस युद्ध के ख़िलाफ़ हो जाए.

तो फिर इस्लामिक स्टेट इराक़ और सीरिया में ख़ुद को मज़बूत करने और विस्तार करने के मुख्य मक़सद पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकता है.

(बीबीसी संवाददाता अमरेश द्विवेदी से बातचीत पर आधारित)

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