आईएस के ख़िलाफ़ 'हर तरह की मदद'

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जिहादी संगठनों से निपटने के इरादे से पेरिस में बुलाये गए विदेश मंत्रियों के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ इराक़ में जारी लड़ाई में 'हर तरह की मदद' देने की बात कही गई है.

पेरिस सम्मेलन में भाग ले रहे 30 देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस मदद में 'जरूरी सैनिक सहायता' भी शामिल है.

उधर ईरान ने कहा है कि उसने इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अमरीकी अभियान में शामिल होने से इंकार कर दिया है. ईरान के सुप्रीम नेता आयतुल्लाह अली ख़मेनई ने कहा कि उन्होंने अमरीकी राजदूत के प्रस्ताव को इसलिए ख़ारिज कर दिया क्योंकि इस्लामिक स्टेट के विरुद्ध अमरीकी क़दम स्वार्थ से प्रेरित हैं.

इससे पहले फ़्रांस के राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद ने कहा कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) के चरमपंथियों की चुनौती पूरी दुनिया के सामने है और इसका जवाब सभी देशों को देना होगा.

अरब जगत के दस देश समेत तकरीबन 40 देशों ने इराक़ और सीरिया में इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी के मध्य पूर्व के देशों के दौरे के बाद ये सम्मेलन बुलाया गया है.

डेविड हेंस की हत्या

आईएस के खिलाफ पिछले हफ्ते अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से पेश की गई कार्ययोजना के लिए समर्थन जुटाने के लिए पेरिस के इस सम्मेलन में जॉन केरी भी शिरकत कर रहे हैं.

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पेरिस में मौजूद बीबीसी संवाददाता लूसी विलियमसन का कहना है कि ब्रितानी सहायताकर्मी डेविड हेंस की हत्या के बाद इस कार्ययोजना को बल मिला है.

इराक़ और सीरिया के बड़े हिस्से पर इस्लामिक स्टेट का नियंत्रण है. अमरीकी गुप्तचर संस्था सीआईए का अनुमान है कि इस इलाके में आईएस के पास 30 हज़ार तक लड़ाके हो सकते हैं.

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