आज़ादी के विरोधियों ने कैसे हासिल की जीत?

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स्कॉटलैंड ने आज़ादी के लिए हुए जनमत संग्रह में ब्रिटेन के साथ एकजुट रहने के पक्ष में मतदान किया है. इसका मतलब ये हुआ कि ब्रिटेन के साथ उनका 300 साल पुराना रिश्ता कायम रहेगा. तो आज़ादी का विरोध करने वाले कैंप को आख़िर जीत मिली कैसे?

1- विरोध करने वाले हमेशा से आगे थे

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इसका विरोध करने वाला खेमा हमेशा से आगे थे. जब 15 अक्तूबर 2012 को एडिनबरा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके बाद 2014 में जनमत संग्रह की बात हुई थी, उस समय अधिकतर सर्वेक्षणों में कहा गया था कि स्कॉटलैंड के 42 लाख मतदाताओं में से सिर्फ़ एक तिहाई को आज़ादी चाहिए.

अगले 18 महीनों में एक के बाद एक कर आए कई सर्वेक्षणों में यही बात सामने आई. जनमत संग्रह विशेषज्ञ जॉन कर्टिस के अनुसार जून तक आए 65 सर्वेक्षणों में सिर्फ़ एक ऐसा था जिसमें आज़ादी के समर्थकों की तादाद ज़्यादा बताई गई थी.

2- स्कॉटलैंड वाले ख़ुद को ब्रितानी मानते हैं

अब चाहे ये, इस जनमत सर्वेक्षण के चलते हुआ हो या ये सिर्फ़ एक चांस की बात हो मगर ख़ुद को ब्रितानी कहलाने की आदत फिर से वापस आई है, इससे भी आज़ादी का विरोध करने वालों को मज़बूती मिली.

स्कॉटिश सोशल एटीट्यूड्स के एक सर्वे के मुताबिक़ साल 2011 में स्कॉटलैंड में रहने वाले सिर्फ़ 15 फ़ीसदी लोग ख़ुद को ब्रितानी मानते थे मगर 2014 में ये बढ़कर 23 फ़ीसदी हो गए. इसी दौरान ख़ुद को स्कॉटिश कहने वालों का मत प्रतिशत 75 से गिरकर 65 हो गया.

अब तो स्कॉटलैंड के लगभग एक तिहाई लोग कहते हैं कि वे जितने स्कॉटिश हैं उतने ही ब्रिटिश भी. एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ 1997 में लेबर पार्टी के टोनी ब्लेयर के प्रधानमंत्री बनने के बाद ऐसा मानने वालों की यह सबसे बड़ा अनुपात है. चार में एक में से भी कम लोगों ने ख़ुद को स्कॉटिश माना ब्रिटिश नहीं.

3- जोख़िम वाली बात

स्कॉटलैंड का बँटवारा चाहने वाले लोगों ने इसका विरोध करने वालों पर आरोप लगाया कि वे लोगों को डराकर ब्रिटेन के साथ बने रहने के लिए मजबूर कर रहे थे.

अप्रैल में स्कॉटलैंड सरकार के प्रमुख (फ़र्स्ट मिनिस्टर) एलेक्स सामंड ने 'नो' अभियान को आधुनिक समय का सबसे अधिक दयनीय, नकारात्मक, निराशजनक और पूरी तरह बोर करने वाला बताया था. उन्होंने 'यस' अभियान को 'सकारात्मक, प्रेरक और आशाजनक' अभियान बताया.

अभी हाल में ही स्कॉटिश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता ने 'नो' अभियान को आतंक फैलाने वाला बताते हुए आलोचना की थी. उनका कहना था कि 'यस' अभियान का पूरा ध्यान 'लोगों के लिए अवसर बनाने' पर है.

'बेटर टुगेदर' या आज़ादी के विरोध में अभियान चलाने वालों ने नकारात्मक होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनका अभियान सकारात्मक है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्कॉटलैंड के रहते हुए ब्रिटेन ने क्या हासिल किया और यूके के साथ रहते हुए और क्या हासिल किया जा सकता है.

इस हफ़्ते के शुरू में ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने स्कॉटलैंड के मतदाताओं से स्वतंत्रता के विपक्ष में वोट डालने की अपील करते हुए कहा था यह तलाक दर्दनाक होगा.

4-'यस' के लहर को काबू में किया

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अख़बार 'संडे टाइम्स' के एक सर्वेक्षण में 10 दिन पहले 'यस' खेमे को बढ़त लेते हुए बताया था, अचानक उसके जीत की संभावना नज़र आने लगी थी.

इस पर 'नो' खेमे ने तेज़ी से प्रतिक्रिया दी. ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और लेबर पार्टी के नेता एडवर्ड मिलिबैंड ने स्कॉटलैंड जाने के लिए संसद में अपना साप्ताहिक प्रधानमंत्री का प्रश्नकाल छोड़ दिया था. लिबरल डेमोक्रेट नेता निक क्लेग भी वहाँ गए थे.

स्कॉटलैंड में लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने स्कॉटिश संसद के अधिकार बढ़ाने के लिए एक समय सारणी बनाई. उन्होंने नए स्कॉटलैंड क़ानून के मसौदे को जनवरी में प्रकाशित करने का वादा किया.

इन प्रयासों की वजह से 'नो' अभियान 'यस' अभियान की लहर थामने में सफल रहा.

5- ग़रीबों या अमीरों के लिए?

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सबसे बड़ा सवाल न होने के बाद भी, यह मतदाताओं के सामने खड़े बड़े सवालों में से एक था. प्रचार अभियान के दौरान दोनों खेमों ने अर्थव्यस्था को लेकर खूब बहस की. इस दौरान तेल और व्यापार का मुद्दा छाया रहा. 'नो' खेमे का कहना था कि स्कॉटिश लोग इस बात से सहमत नहीं हैं कि आज़ाद स्कॉटलैंड बेहतर होगा.

इस दौरान असहमति के केंद्र में पाउंड था. स्कॉटिश सरकार लगातार इस बात पर ज़ोर दे रही थी कि एक ही तरह की मुद्रा स्कॉटलैंड और बाकी के यूके के हित में होगी. लेकिन यूके सरकार ने इसे सख़्ती से नकार दिया.

स्कॉटलैंड की सरकार ने अनुमान लगाया कि 15 साल बाद हर स्कॉटिश व्यक्ति की जेब में एक हज़ार पाउंड होंगे. वहीं ब्रितानी वित्त मंत्रालय का कहना था कि आज़ाद होने की तुलना में यूके में रहते हुए स्कॉटलैंड में कर की दरें कम होंगी और खर्च करने के लिए पैसा अधिक होगा. उन्होंने अनुमान लगाया था कि 2016-17 के बाद हर साल स्कॉटलैंड में यूके डेविडेंड के 14 सौ पाउंड प्रति व्यक्ति रहने का अनुमान लगाया गया था.

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