'अमरीकी दूतावासों पर हमले में मदद की'

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न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में मिस्र के एक नागरिक ने केन्या और तंज़ानिया में अमरीकी दूतावासों पर 1998 में हुए धमाकों में मदद के आरोप क़बूल कर लिए हैं.

मगर एक जज ने अभियुक्त अदेल अब्दुल बारी की समझौता याचिका स्वीकार नहीं की है. ऐसे में उन्हें 25 साल की जेल हो सकती है.

अब्दुल पर साज़िश रचने और सामूहिक संहार वाले हथियार इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगे थे.

नैरोबी और दारेस्सलाम में अमरीकी दूतावासों पर 1998 में हुए हमलों में 200 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

'ज़िम्मेदारी'

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Image caption अदेल अब्दुल बारी ने अदालत में अपना गुनाह कबूल किया.

2012 में ब्रिटेन से अब्दुल बारी का प्रत्यर्पण मुस्तफ़ा कमाल मुस्तफ़ा (अबू हमजा) के साथ हुआ था.

उनके ख़िलाफ़ 285 से ज़्यादा आरोप हैं. इनमें हत्या की धमकी देने और विदेश में अमरीकी नागरिकों की हत्या की साज़िश रचने जैसे आरोप भी हैं.

अब्दुल के ख़िलाफ़ 100 अन्य आरोपों पर फ़ैसला सुनाया जाना बाक़ी है.

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अब्दुल बारी ने फ़ैक्स मशीन और फ़ोन कॉल्स से मीडिया के सामने धमाकों की ज़िम्मेदारी लेने का अपराध माना था.

अगर जज समझौता ख़ारिज़ कर देते हैं, तो बारी को अपना क़बूलनामा वापस लेने की छूट होगी और सुनवाई जारी रहेगी.

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