पाकिस्तान: दूसरों की मदद को क़ुर्बान ज़िंदगी

  • 23 सितंबर 2014
अब्दुल सत्तार इदी

साठ साल पहले पाकिस्तान के इस शख़्स ने अपने देश में ग़रीब लोगों की मदद करने के लिए अपना सब कुछ छोड़ दिया था और चैरिटेबल संस्था ईधी फ़ाउंडेशन की शुरुआत की थी.

ये हैं अब्दुल सत्तार ईधी. वो व्यक्ति, जिनका नाम पाकिस्तान में शायद सबसे ज़्यादा सम्मान से लिया जाता है. ईधी फ़ाउंडेशन आज की तारीख़ में पाकिस्तान के साथ-साथ दुनिया की भी सबसे बड़ी कल्याणकारी संस्थाओं में एक है.

यह संस्था पाकिस्तान भर में स्कूल, अस्पताल, और एंबुलेंस सेवाएं चलाती है.

अक्सर पाकिस्तान सरकार जिन सेवाओं को सही तरीके से मुहैया कराने में असफल होती है उन सेवाओं को मुहैया कराने में ईधी फ़ाउंडेशन की बड़ी भूमिका होती है.

ज़िम्मेदारी

अब्दुल सत्तार ईधी बताते हैं कि सादगी, ईमानदारी, कड़ी मेहनत और समय का पाबंद होना ही उनकी सफलता का राज है.

उनके मुताबिक़, "यह हर एक की ज़िम्मेदारी है कि वे दूसरों का ख़्याल रखे. इंसान होने का यही मतलब है. अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग ऐसा सोचेंगे तो कई परेशानियां ख़त्म हो जाएंगी."

Image caption मानवता की सेवा के प्रति उनका जज्बा उन्हें पाकिस्तान के महान शख्सों में शुमार करता है.

उनकी मुहिम में सबसे मज़बूती से उनका साथ देने वाली कोई और नहीं उनकी पत्नी बिलकीस है.

बिलकीस बताती हैं कि उन्हें गटर, नाली और कूड़े से कई मरे हुए बच्चों के शव मिलते थे. बहुत से बच्चे उन्हें जीवित भी मिलते हैं, जिनकी ये लोग परवरिश करते हैं.

वो कहती हैं, "हमें लावारिस बच्चों को रखने पर चरमपंथियों की धमकियां मिलती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इन बच्चों को पाल कर हम नाजायज़ बच्चे पैदा करने को बढ़ावा दे रहे हैं."

पाकिस्तान में 50 हज़ार अनाथ बच्चों को ईधी की संस्था से सहारा मिला हुआ है.

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