अमरीकी जनजाति को 3300 करोड़ का हर्जाना

नवाजो की ज़मीन

अमरीकी नवाजो जनजाति को एक क़ानूनी विवाद का निपटारा करने के बदले अमरीकी सरकार क़रीब 3300 करोड़ रुपए अदा करने पर सहमत हो गई है.

नवाजो अमरीकी मूल की सबसे बड़ी जनजाति है और इसके सदस्यों की संख्या तीन लाख से भी ज़्यादा है.

यह किसी भी एक जनजाति को सरकार की तरफ़ से दी जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी रक़म है.

'ऐतिहासिक समझौता'

सरकार के ख़िलाफ़ मुक़दमें में दावा किया गया था कि अमरीकी ने पिछले 50 सालों से आदिवासियों के संसाधनों का दुरूपयोग कर रही है.

सरकार से समझौते के बाद नवाजो नेशन मुक़दमा वापस लेने के लिए तैयार हो गए हैं.

इस जनजाति की क़रीब एक करोड़ 40 लाख एकड़ ज़मीन खेती, तेल और गैस उत्पादन और खनन के लिए लीज़ पर दी गई है.

नवाजो देश के राष्ट्रपति बेन शेली ने इस समझौते को 'जनजातियों के संप्रभुता की जीत' क़रार दिया है.

उन्होंने कहा कि एक लंबी और जटिल प्रक्रिया के बाद 'नवाजो नेशन को उचित और न्यायसंगत मुआवज़ा' मिल रहा हैं.

पहले भी हुए हैं समझौते

लेकिन नवाजो नेशन के अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता जनजाति को अमरीकी सरकार पर भविष्य में मुक़दमा करने से नहीं रोकता.

इमेज कैप्शन,

अमरीका नवाजो जनजाति की ज़मीन इस्तेमाल करने के बदले भुगतान करेगा.

वहीं अमरीका के अटार्नी जनरल एरिक होल्डर ने कहा, "इस ऐतिहासिक समझौते से अमरीका और नवाजो नेशन के बीच चले आ रहे एक लंबे विवाद का समाधान हो गया है."

अमरीका ने पहले भी अन्य जनजातियों के साथ इस तरह के समझौते किए हैं.

साल 2012 में अमरीका ने 41 जनजातियों को क़रीब 60 अरब रुपए मुआवज़ा देकर समझौता किया था.

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