भारत के लिए ओबामा का 'शब्दजाल'

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Image caption ओबामा भारत के संबंध में इन शब्दों का प्रयोग करते हैं.

कोई भी व्यक्ति किसी मुद्दे पर एक अरसे तक किन शब्दों का प्रयोग करता रहा है उसी से उसके विचारों को भांपा जा सकता है. इसे अंग्रेज़ी में 'वर्ड क्लाउड' कहा जाता है. इस हिंदी में हम शायद शब्द जाल कह सकते हैं.

आइए नज़र डालते हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति भारत के बारे में कैसी शब्दावली का प्रयोग करते हैं.

ओबामा के कार्यकाल में भारत-अमरीका संबंधों में उतार-चढाव आते रहे हैं. लेकिन ओबामा और मोदी की मुलाक़ात से दोनों पक्षों को काफ़ी उम्मीदें हैं.

प्रधानमंत्री बनने तक अमरीका मोदी को 2002 के गुजरात दंगों में कथित भूमिका के कारण वीजा देने से इनकार करता था.

जानिए आख़िर ओबामा की भारत नीति किन शब्दों में आकार लेती है?

ओबामा की 'भारत नीति'

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भारत के बारे में ओबामा के भाषणों में 'आतंकवाद', 'अर्थव्यवस्था', 'भागीदारी', 'सुरक्षा' जैसे शब्दों का अक्सर इस्तेमाल होता है.

लगभग हर मौके पर उन्होंने भारत और अमरीका के बीच 'मजबूत' और 'पारंपरिक साझेदारी' की बात कही है.

उन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई और अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने में भारत के प्रयासों की भी सराहना की है.

Image caption मनमोहन सिंह की ओबामा ने कई मौकों पर प्रशंसा की है.

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि ओबामा आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तानी एजेंसियों की भूमिका और भारत पर इसके सीधे असर की बात शायद ही करते हैं.

पाकिस्तान का जिक्र होगा?

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव के बीच ये देखना दिलचस्प होगा कि ओबामा मोदी के साथ साझे बयान में पाकिस्तान का जिक्र करेंगे या नहीं.

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कुछ एक मौकों पर ओबामा एशिया में भारत की भूमिका का जिक्र करते हैं.

विश्लेषक कहते हैं कि ओबामा एशिया और भारत का एक ही वाक्य में इस्तेमाल करके भारत को चीन के मुकाबले खड़ा करने की कोशिश करते हैं.

भारत में निवेश 'मुश्किल'

ओबामा के बयानों में 'अर्थव्यवस्था' शब्द का भी अक्सर इस्तेमाल होता है, इससे जुड़े उनके कुछ विवादास्पद बयान भी शामिल हैं.

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Image caption ओबामा ने कहा था कि भारत में खुदरा क्षेत्र में निवेश करना मुश्किल है.

जुलाई 2012 में उन्होंने भारत में निवेश की कठिन परिस्थितियों की चर्चा की थी.

उन्होंने कहा था, "लोग कहते हैं भारत में निवेश करना अभी भी काफ़ी मुश्किल है. जैसे खुदरा क्षेत्र में भारत विदेशी निवेश को रोकता है जो दोनों देशों में रोज़गार पैदा करने और भारत के विकास के लिए काफ़ी ज़रूरी है."

ओबामा के ऐसे बयानों पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

विश्लेषक कहते हैं कि मोदी के साथ होने वाली मुलाक़ात में ओबामा शायद ऐसी ग़लतियाँ नहीं दोहराना चाहेंगे.

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