कूंग-फ़ू कराटे वाला मंदिर बना ब्रांड

  • 13 अक्तूबर 2014
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चीन का प्रचीन शाओलीन मंदिर इन दिनों व्यापार का बड़ा केंद्र बना हुआ है.

यह मंदिर कूंग-फ़ू कराटे खेलने वाले बौद्ध भिक्षुओं के लिए जाना जाता है लेकिन कौन है वो शख़्स जिसने इसे दुनिया भर में पहचान दिलवाई है.

ग्रैंडमास्टर शी योंगजीन एक बहुत अलग क़िस्म के बौद्ध भिक्षु है. उन्होंने 1500 साल पुराने मंदिर का हाल ही में आधुनिकीकरण किया है.

इसके लिए उन्होंने एमबीए की पढ़ाई भी की.

लेकिन उनके इस क़दम ने चीन में विवाद भी खड़ा किया है.

आलोचना

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उन्हें कई चीनियों के आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है. मंदिर के व्यवसायिकरण के लिए कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं.

मैं ना ही इस मंदिर का प्रशंसक हूं और ना ही अनुयायी हूं लेकिन कइयों की तरह मैं अक्सर यहां के किसी भी भिक्षु से मुलाक़ात को लेकर उत्सुक रहता हूं.

जब 'शाओलीन टेंपल' फ़िल्म पहली बार 1982 में हांगकांग में दिखाई गई थी तो मैं उस वक़्त एक नौजवान लड़का था और मैं जेट ली और दूसरे अभिनेताओं के स्तब्ध कर देने वाले कूंग-फ़ू कराटे से अभिभूत था.

तब से मैं इस बात पर यकिन करता हूं कि शाओलीन के सभी भिक्षु कूंग-फ़ू मास्टर हैं.

ये सुनना कि शी लंदन में थे बहुत अच्छा मौका था क्योंकि वे शायद ही कभी इंटरव्यू देते है.

ब्रांड

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मेरे दिमाग़ में यह आ रहा था कि क्या वे बीबीसी के न्यूज़रूम में हवा में छलांगे लगाएंगे या एक उंगली पर खड़े होकर दिखाएंगे.

लेकिन इंटरव्यू में मुझे निराशा हुई.

हालांकि मैंने उनसे इंटरव्यू के दौरान कूंग-फूं दिखाने को कहा लेकिन उन्हें कुछ भी करने को मना कर दिया.

उन्होंने शायद सोचा कि वे बूढ़े हो गए हैं लेकिन वाक़ई में 49 साल की अवस्था में वे मुझसे ज़्यादा जवान थे.

उन्होंने मुझसे कहा कि वे इन दिनों बहुत कम अभ्यास करते हैं इसलिए कूंग-फ़ू नहीं करते.

बाद में उन्होंने अपनी ही बात को काटा लेकिन एक ग्रैंडमास्टर से कौन बहस करता.

शी ने अपने असधारण तौर-तरीक़ों को अजमाकर शाओलीन मंदिर को दुनिया भर में पहचान दिलवाई. अब यह करोड़ों डॉलर का ब्रांड बन चुका है.

व्यक्तिगत आरोप

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Image caption शाओलीन मंदिर चीन के चार पवित्र बौद्ध मंदिरों में से एक है.

लेकिन चीन में लोगों ने इसे एक मंदिर की बजाए एक व्यापार कहकर आलोचना करनी शुरू कर दी है.

शी को ऊपर कई गोपनीय बैंक अकाउंट, लक्ज़री कार, आईपैड रखने, और यहां तक की बीवी-बच्चे वाला आदमी जैसे व्यक्तिगत आरोप भी लगने लगे हैं.

उन्होंने इन आरोपों पर कभी भी प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इन आरोपों पर पूछे गए मेरे सवाल पर भी मुझे इसका सीधा जवाब नहीं मिला.

पूरे इंटरव्यू के दौरान मुझे लगा कि मैं एक धार्मिक गुरू के बजाए एक राजनेता या किसी सरकारी अधिकारी से बात कर रहा हूं.

उन्हें शाओलीन मंदिर के प्रधान भिक्षु के बजाए सीईओ कहना ज़्यादा बेहतर होगा.

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