फलस्तीनियों के लिए 330 अरब रूपए का वादा

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अंतरराष्ट्रीय दानकर्ताओं ने फलस्तीनियों के लिए पांच अरब 40 करोड़ डॉलर यानी लगभग 330 अरब रूपए देने का वादा किया है.

मिस्र की राजधानी क़ाहिरा में एक सम्मेलन में नोर्वे के विदेश मंत्री बोर्गे ब्रेंडे ने ऐलान किया कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण द्वारा मांगी गई चार अरब डॉलर की राशि से ये रक़म कहीं ज़्यादा है.

ब्रेंडे ने कहा कि इसमें से आधी रक़म ग़ज़ा के पुनर्निमाण के लिए है हालांकि उन्होंने ये साफ़ नहीं किया कि बाकी राशि कैसे इस्तेमाल होगी.

अकेले क़तर ने ही एक अरब डॉलर देने का वादा किया है.

इसराइल और हमास के बीच 50 दिन तक चले संघर्ष में कम से कम एक लाख ग़ज़ा वासियों के घर नष्ट हो गए थे और ग़ज़ा का ज़्यादातर बुनियादी ढांचा तबाह हो गया था.

इसराइल और हमास के बीच सात हफ़्ते तक चला संघर्ष 26 अगस्त को एक संघर्ष विराम के ज़रिए ख़त्म हुआ था.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ इसमें 2100 से ज़्यादा फ़लस्तीनी मारे गए थे जिनमें से ज़्यादातर आम नागरिक थे. इसराइल के 67 सैनिक और छह नागरिक मारे गए थे.

'अहम क़दम'

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एक पत्रकार सम्मेलन में बोलते हुए नॉर्वे के विदेश मंत्री ने कहा, "ये एक अहम क़दम और फ़लस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता का एक बेहद अहम संकेत है."

सम्मेलन में दर्जनों देशों के राजनयिक शामिल थे.

अमरीका ने 21 करोड़ 20 लाख डॉलर की सहायता देने का वादा किया है. संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की 20-20 करोड़ डॉलर देंगे.

सम्मेलन में अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने कहा कि ये वक़्त एक दीर्घकालीन शांति योजना बनाने का है जिससे फ़लस्तीनियों के आत्मसम्मान और इसराइलियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

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