समलैंगिकों की शरणस्थली थी मोरक्को

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मोरक्को के शहर माराकेश में एक ब्रितानी व्यक्ति को पिछले हफ़्ते समलैंगिक गतिविधियों के कारण जेल जाना पड़ा था.

लेकिन एक वक्त ऐसा था जब अमरीकी और ब्रितानी समलैंगिकों के लिए मोरक्को शरणस्थली हुआ करता था.

वे अपने देशों में लागू समलैंगिकता के प्रतिबंधों से बचने के लिए मोरक्को के खुले माहौल में आते थे.

मोरक्को के टैंजियर्स शहर के एक मुख्य सड़क के पास वीराने में एक होस्टल है इल मुनीरा. यह एक सफेद रंग की बिल्डिंग है.

इसे एक परिवार चलाता है. इस होस्टल के कमरा नंबर नौ में 1950 के दशक में विलियम बरोज ने नशे की हालत में बीसवीं शताब्दी का सबसे अधिक स्तब्ध करने वाला उपन्यास 'नेकेड लंच' लिखा था.

इस किताब को अमरीका में अश्लीलता के आरोप में प्रतिबंधित किया गया था.

लेखकों का घर

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यह किताब आत्मकथा, साइंस फिक्शन, व्यंग्य और समलैंगिक सेक्स की व्याख्याओं का मसालेदार दस्तावेज़ था.

जब मैं इस होस्टल के अंदर गया तो उस घर के सबसे छोटे सदस्य ने मुझसे कहा कि मैं चारों तरफ घूम सकता हूं लेकिन कमरा नंबर नौ बंद है. उसके अंकल उसकी चाभी अपने साथ लेकर गए हैं.

बरामदे में रबर प्लांट के पौधे के पास बरोज की हैट लगाए तस्वीर टंगी है. मैं हिम्मत जुटाकर सीढ़ियों से नीचे उतरता हुआ उस क्वार्टर में गया जहां ये परिवार रहता है.

घर के मालकिन ने मुझे चारों तरफ घुमाकर होस्टल दिखाया लेकिन कमरा नंबर नौ अब भी बंद था.

मैंने पूछा कि क्या अंदर देखना संभव है. उन्होंने जवाब दिया कि ये थोड़ा गंदा होगा.

मैंने कहा कि कोई बात नहीं है. तब वे चाभी लेकर आई और दरवाजा खोलकर हमें अदंर ले गई.

बेखौफ़ समाज

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उन्होंने मुझे बताया कि बरोज इस कमरे में रहते थे जबकि दूसरे लेखक एलेन जिंसबर्ग और जैक केरॉक ने कमरा नंबर चार और पांच किराए पर लिया हुआ था.

उन्होंने बताया कि कभी कभार 'द शेल्टरिंग स्काई' की लेखक अमरीकी उपन्यासकार पॉल बॉल्स कमरा नंबर सात में रहने आती थीं.

'नेकेड लंच' की तरह 'द शेल्टरिंग स्काई' भी इंसान के मन के स्याह पहलुओं को दर्शाने वाला उपन्यास था.

लेकिन क्यों अमरीकी साहित्य जगत के ये धुरंधर टैंजियर्स खींचे चले आते थे.

जब मैंने ये सवाल सीमोन-पियरे हैमेलिन से पूछा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं समझता हूं कि आप इसका कारण जानते होंगे और फिर कुछ नहीं कहा.

सीमोन वहां एक किताब की दुकान चलाते हैं.

स्वपनलोक

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दशकों से टैंजियर्स और मोरक्को के दूसरे शहर समलैंगिक पर्यटकों को अपनी ओर खींचते आए हैं. अंग्रेज शिक्षक एंड्रयू हसी के शब्दों में टैंजियर्स "एक ख़तरनाक अज्ञात सुख का स्वपनलोक" था.

1950 के दशक में समलैंगिकता के प्रति दमनकारी रवैया रखने वाले अमरीकी समाज को छोड़कर समलैंगिक मोरक्को भाग रहे थे.

वहां मोरक्को में अधिक खुला महौल था. वे वहां बिना किसी खौफ के अपने इच्छाओं को जी सकते थे.

वो वहां पैसे के बदौलत स्थानीय नौजवानों और गांजे का सौदा कर सकते थे.

पैसे का रिश्ता

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विदेशियों और मोरक्को के बीच पैसों के इस खाई से वेश्यवृति का धंधा फला-फूला लेकिन ये रिश्ता सिर्फ पैसे पर टिका हुआ नहीं था.

पॉल बॉल्स की कलाकार अहमद याकुबी और उनकी बीवी जेन के साथ बड़ी गहरी दोस्ती थी. वे इनके अपार्टमेंट के ऊपरी हिस्से में एक किसान महिला शेरिफा के साथ रहते थे.

तो क्या मोरक्को जो कि जाहिर तौर पर एक इस्लामिक देश है अपने यहां समलैंगिकता को फलने-फूलने की इजाज़त देते हैं.

लेखक बारनेबी रॉगर्सन का कहना है कि यह एक विरोधाभासों से घिरा समाज है.

सहिष्णुता

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वे कहते हैं, "यह एक ऐसी जगह है जहां चार संस्कृतियों का मेल है, अफ्रीकी, भूमध्यवासी, अरबी या इस्लामी. ये सभी इस बात में यकीन करते हैं कि सभी औरत और मर्दों में प्रचुर मात्रा में कामुकता होती है जो कि फितना से संचालित होता है. जो किसी भी समय पर यौन उत्पन्न अराजकता के साथ परिवार, समाज और राज्य को अपने दबाव में रखता है."

फितना से उनका मतलब आकर्षण, प्रलोभन, असंतोष, अशांति, दंगा, विद्रोह सब से हैं.

लेकिन सेक्स की अराजकता के बावजूद एक समझ है कि ये मानवीय स्वभाव है और आख़िरकार आपको जीना है और दूसरों को जीने देना है.

रॉगर्सन का कहना है, "मोरक्को हमेशा ऐसा देश रहा है जहां सहिष्णुता का सिर्फ भाषण नहीं दिया जाता बल्कि उसे जिया जाता है."

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