बिशपों से समलैंगिक क्यों हैं निराश?

कैथोलिक धर्मसभा, वेटिकन में पोप फ्रांसिस इमेज कॉपीरइट AP

वेटिकन के बिशपों ने समलैंगिकों की व्यापक स्वीकार्यता के प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया है.

समलैंगिकों के अधिकार के लिए लड़ने वाले कैथोलिक समूह इस प्रस्ताव को नकार दिए जाने से निराश हैं.

वेटिकन में दो हफ़्ते तक चली धर्मसभा में इस प्रस्ताव को ज़रूरी दो-तिहाई बिशपों का समर्थन नहीं मिल सका. इसे पोप फ्रांसिस की कोशिशों के लिए भी झटका माना जा रहा है.

पोप फ्रांसिस समलैंगिकों के प्रति खुलेपन को अपनाने के समर्थक हैं.

समलैंगिकों को 'स्वीकारने और सम्मान देने' की मांग को मसौदा रिपोर्ट में शामिल किया गया था.

अंतिम रिपोर्ट में बस इतना कहा गया है कि समलैंगिक के प्रति किसी भी तरह का भेदभाव बरतने से बचा जाए.

वेटिकन में चल रहे विचार-विमर्श में 200 से ज़्यादा बिशपों ने भाग लिया. इसमें पारिवारिक जीवन से जुड़े कई विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा की गई.

'बेहद निराशाजनक'

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Image caption वेटिकन में दो हफ्ते चली कैथोलिक धर्मसभा में समलैंगिकों के स्वीकार्यता पर आम सहमति नहीं बन पाई.

अमरीकी कैथोलिक समलैंगिक अधिकार समूह, 'द न्यू वेज मिनिस्ट्री' ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धर्मसभा की अंतिम रिपोर्ट में समलैंगिकों की स्वीकार्यता को महत्व नहीं दिया गया.

एक अन्य समूह 'डिग्निटी यूएसए' ने एक बयान जारी कर इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है .

समूह ने कहा, "दुख की बात है कि जो अधिक समावेशी चर्च की जरूरत को समझते हैं उनकी हार हुई."

हालाँकि ब्रिटिश कैथोलिक पत्रिका, टैबलेट के क्रिस्टोफर लैंब ने बीबीसी को बताया कि धर्मसभा में शामिल होने वाले ज़्यादातर बिशप ऐसे देशों से आए थे जहां समलैंगिकता ग़ैरक़ानूनी है.

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