इंसानों में कहां से आया इबोला?

  • 19 अक्तूबर 2014
इबोला वायरस की वजह, चमगादड़ का मांस इमेज कॉपीरइट AFP

अनुमान है कि इबोला वायरस के संक्रमण का माध्यम जंगली जानवरों का मांस हो सकता है. इस वायरस से संक्रमित होने वाले पहले परिवार ने चमगादड़ का शिकार किया था, जिनमें यह वायरस पाया जाता है.

तो क्या पश्चिम अफ़्रीक़ा जहां जंगली जानवरों का मांस खाने की परंपरा है, वही इससे उपजे संकट के लिए ज़िम्मेदार है?

दक्षिण-पूर्व गिनी के ग्यूकेडो गाँव में सबसे पहले दो साल के एक बच्चे में इबोला पाया गया था. यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अक्सर चमगादड़ का शिकार किया जाता है और खाया जाता है.

गंभीर बीमारी की वजह

इस बच्चे की दिसंबर 2013 में मौत हो गई थी. इस बच्चे के परिवार का कहना है कि उन्होंने दो प्रजाति के चमगादड़ों का शिकार किया था.

जंगली जानवरों के मांस में मुख्यतौर पर चिम्पैंज़ी, गोरिल्ला, चमगादड़ और बंदर आते हैं. इसमें सांप, चूहे और साही जैसे जानवर भी शामिल किए जा सकते हैं.

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Image caption अफ्रीका में इबोला वायरस से हज़ारों की संख्या में लोगों की मौत हुई है

सेंटर ऑफ़ इंटरनेशनल फ़ॉरेस्ट्री रिसर्च के एक अनुमान के मुताबिक़ कॉन्गो बेसिन में हर साल 50 लाख टन जंगली जानवरों के मांस की खपत होती है.

इनमें से कुछ जानवरों से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि फल खाने वाले चमगादड़ों की कुछ प्रजातियों में इबोला वायरस हो सकता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ नॉटिंघम में प्रोफ़ेसर जोनॉथन बॉल ने बीबीसी से कहा कि वायरस इंसानों में 'कैसे पहुंचते हैं', यह साफ़ नहीं हैं. इसके लिए चिम्पैंज़ी जैसे किसी माध्यम की भूमिका होती है. लेकिन इस बात के साक्ष्य भी मिले हैं कि चमगादड़ से वायरस का संक्रमण सीधे इंसानों में हो सकता है.

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