कैसा होता है तालिबान के साए में रहना?

  • 20 अक्तूबर 2014

अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब एक दशक तक चले संघर्ष के बाद अब अंतरराष्ट्रीय सेनाएं वापस लौट रही हैं लेकिन अभी भी देश के कई इलाक़ों में तालिबान की पकड़ मज़बूत है. बीबीसी के पैनोरामा कार्यक्रम की टीम को पिछले दिनों काबुल से बस एक घंटे की दूरी पर तालिबान के अड्डे पर जाने का मौक़ा मिला है.

काबुल से लगभग सौ किलोमीटर दूर तंगी घाटी की धूल भरी सड़कों पर अभी हम पहुंचे ही थे कि हम तालिबान के प्रभाव वाले इलाक़े में थे. इस घाटी को काबुल का गेटवे या प्रवेश द्वार कहा जाता है और यहीं से राजधानी पर तालिबान के हमले होते हैं.

पिछले कुछ वर्षों में नैटो और तालिबान के बीच सबसे हिंसक संघर्षों वाली यह जगह वारदाक प्रांत में आती है.

अफ़ग़ानिस्तान से दस साल से भी अधिक समय तक रिपोर्टिंग और हेलमंद में तालिबान लड़ाकों से अपह्त होने के कारण मुझे पता था कि ये एक ख़तरनाक जगह है, किसी पश्चिमी देश के पत्रकार के लिए तो और भी अधिक.

स्वयंभू कमांडर

मुझे इस इलाक़े के स्वयंभू तालिबान कमाडंर सईद रहमान से मिलना था जिन्हें यहां गवर्नर बदरी भी कहा जाता है. सिर्फ़ 27 साल के गवर्नर बदरी ने 2001 में उस समय अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ़ लड़ना शुरु किया था जब अमरीका ने तालिबान को सत्ता से हटाया था.

उनका कहना था कि वो तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक अमरीकी देश छोड़कर नहीं जाते. साथ ही वो अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक शासन भी लाना चाहते हैं.

किसी रिपोर्टर को ये मौक़ा देना गवर्नर बदरी के लिए पब्लिसिटी का मौक़ा था और वो बार-बार अपने नियंत्रण वाले इलाक़े दिखा रहे थे. उन्होंने मुझे एक ऊंची जगह से वो इलाक़ा दिखाया जहां एक बड़ा अमरीकी पोस्ट हुआ करता था जो तीन साल पहले हटा लिया गया.

इस चोटी से ऐसी कई जगहें देखी जा सकती थीं जहां अमरीकी सैनिकों को निशाना बनाया गया था.

किसके नियंत्रण में वारदाक

सेना के प्रवक्ता जनरल मोहम्मद ज़ाहिर आज़मी मुझसे कहते हैं कि वारदाक प्रांत अफ़ग़ानिस्तान की सेना के नियंत्रण में हैं लेकिन यहां तंगी घाटी में तालिबान के सैनिक आराम से घूमते हैं.

जनरल बदरी के अनुसार अफ़ग़ान सैनिक कम ही बाहर निकलते हैं और जब निकलते है तो अत्यंत सुरक्षा में.

तंगी घाटी के स्कूलों पर भी तालिबान का नियंत्रण साफ़ दिखता है. इमाम अबू हनीफ़ा सूक्ल में 50 शिक्षक हैं और लगभग 1400 छात्र. यहां गणित और विज्ञान पढ़ाया जाता है लेकिन तालिबान ने ये तय कर रखा है कि धर्म की पढ़ाई किसी भी पाठ्यक्रम के मूल में हो.

इस स्कूल में कोई लड़की नहीं पढ़ती, यहां तक की स्कूल के आस-पास कोई लड़की दिखती भी नहीं है.

हालांकि अब तालिबान कहते हैं कि उनकी तरफ़ से लड़कियों की शिक्षा पर कोई पाबंदी नहीं है लेकिन स्कूल के मास्टर कहते हैं कि यहां लड़कियों के लिए कोई स्कूल नहीं है और न ही बनने की कोई योजना है.

स्कूल और न्याय व्यवस्था

तंगी घाटी में ज़मीन को लेकर झगड़े का निपटारा जनरल बदरी ही करते हैं. वही जज हैं और वही ज्यूरी भी. वो कहते हैं, ''हम अल्लाह की मदद से फ़ैसले लेते हैं. और ये फ़ैसले काबुल की सुप्रीम कोर्ट से जल्दी होते हैं. यहां जब फ़ैसला हो गया तो हाई कोर्ट में जाने की ज़रुरत नहीं होती.''

जनरल बदरी इलाक़े के सबसे वांछित लोगों में से हैं. अमरीकी सेना ने उन्हें मारने के लिए कई अभियान चलाए हैं और ड्रोन हमले भी किए हैं.

आख़िरी हमले में वो बाल बाल बचे थे. वो कहते हैं कि आख़िरी हमले में उनके एक कान से सुनने की क्षमता ख़त्म हो गई. वो कहते हैं, ''मैं जब भी मोबाइल ऑन करता हूं ड्रोन आ जाता है. अब मैं मोबाइल का इस्तेमाल कम करता हूं.''

मैंने चार दिन तालिबान के साथ बिताए जिस दौरान मुझे हर तरह के लोगों से बात करने की अनुमति दी गई. कुछ चुने हुए लोग भी थे लेकिन हर बातचीत तालिबान की मौजूदगी में ही हुई.

लोगों को इस बात की राहत थी कि अब शांति है क्योंकि जब विदेशी फ़ौजें थीं तो लड़ाईंयां बहुत होती थी.

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एक व्यक्ति ने अपनी पहचान छुपाते हुए इतना ही कहा, ''हम दोनों पक्षों से डरे हुए हैं. यहां कोई सच नहीं बोलेगा.''

मैं जो देख पा रही थी वो यही था कि तालिबान भले ही तंगी घाटी जैसे कुछ इलाक़ों पर नियंत्रण बना ले लेकिन वो काबुल पर चढ़ाई करने की स्थिति में नहीं है और उनके लिए अब किसी बड़े शहर पर नियंत्रण कर पाना भी लगभग असंभव हो चला है.

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