नकली बच्ची के साथ 'वेबकैम सेक्स' पर सज़ा

  • 21 अक्तूबर 2014
ऑपरेशन स्वीटी

ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति को एक '10 साल की नकली बच्ची' के साथ ऑनलाइन अश्लील हरकतें करने पर सज़ा सुनाई गई है. माना जा रहा है कि यह इस तरह का दुनिया का पहला मामला है.

एक समाजसेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने एक गुप्त स्टिंग ऑपरेशन के तहत इंटरनेट पर 10 साल की एक फ़िलीपीनी लड़की के रूप में ख़ुद को प्रस्तुत किया.

इस स्टिंग के लिए लड़की का नाम स्वीटी रखा गया था. समाजसेवी संस्था ने स्वीटी से संपर्क करने वाले करीब एक हज़ार लोगों का ब्यौरा संबंधित देशों की पुलिस को भेज दिया है.

इंटरनेट पर स्वीटी से ज़्यादातर लोगों ने पैसे के बदले वेबकैम के सामने यौनक्रिया करने की मांग की थी.

स्वीटी से ऐसी मांग करने वाले 110 ब्रितानी नागरिकों के बारे में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (एनसीए) को जानकारी दे दी गई है.

एनसीए का कहना है कि जांच जारी है लेकिन अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं की गई है.

सज़ा

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ब्रिस्बेन की ज़िला अदालत में यौन हमलावर के रूप में पेश किए गए स्कॉट रॉबर्ट हान्सेन ने स्वीटी को अपनी आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने, अपने कंप्यूटर में बाल यौन दुराचार की तस्वीरें रखने का जुर्म स्वीकार किया.

उन्हें दो साल जेल की सज़ा सुनाई गई है लेकिन उनके तुरंत जेल जाने की संभावना नहीं है क्योंकि पिछले आठ महीने से वह नज़रबंदी में हैं.

उन्हें 12 महीने का सुधार कार्यक्रम का पालन करना होगा. उन्हें यौन हमलावर उपचार कार्यक्रम में शामिल होने को कहा गया है.

मामले की सुनवाई करते हुए जज राइरी ने कहा कि लड़की असली नहीं थी इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, "अगर आपको यकीन है कि वह नौ साल की बच्ची है तो कानून कहता है कि यह काफ़ी है".

स्वीटी ऑपरेशन के तहत हुई यह पहली सज़ा है. इसे हॉलैंड की एक समाजसेवी संस्था ने तैयार किया है.

इस कार्यक्रम के प्रमुख हान्स गुइत ने कहा कि उनके सहयोगियों को हमेशा उम्मीद रही कि इस जानकारी का इस्तेमाल पुलिस अपने अभियानों के लिए करेगी.

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उन्होंने कहा कि पुलिस को और सक्रिय होना होगा, "इन लोगों को ढूंढने और पाने का एक ही तरीका है, इंटरनेट की निगरानी की जाए."

चार शोधकर्ताओं के दल ने 2013 में 10 हफ़्ते तक इस प्रोजेक्ट पर काम किया. वे एक चैट रूम में फ़िलीपीनी लड़की के रूप में बैठे.

कई बार उन्होंने एक कंप्यूटरीकृत अवतार का भी इस्तेमाल किया जिसे उन्होंने लोगों को वेब कैम के ज़रिए दिखाया.

इस दौरान उनसे हज़ारों आदमियों ने संपर्क किया. 1,000 लोगों के नाम इस दल ने इंटरपोल को दिए, जिसने इन्हें दुनिया भर के 71 देशों में अधिकारियों को दिया.

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