पाकिस्तान में धमाके ही नहीं ठहाके भी

  • 30 अक्तूबर 2014
साद हारून

पाकिस्तान के कॉमेडियन साद हारून दुनिया के दूसरे सबसे ज़्यादा मजाक़िया व्यक्ति हैं.

अमरीका में हुए पहले 'लाफ़ फ़ैक्ट्री फ़नियस्ट पर्सन इन द वर्ल्ड' प्रतिस्पर्धा में वह दूसरे स्थान पर रहे.

वहीं फ़िनलैंड के इज़्मो लीकोला को इस प्रतिस्पर्धा में दुनिया का सबसे मजाक़िया व्यक्ति चुना गया.

पाकिस्तान में जो लोग रोज़ाना चरमपंथ, ग़रीबी और अशिक्षा की चर्चा से ऊब गए हैं, उनके लिए साद हारून का प्रतिस्पर्धा में दूसरा स्थान हासिल करना एक असाधारण पहलू है.

पढ़िए पूरी कहानी

इस बात पर यक़ीन होना मुश्किल है कि पाकिस्तानी हास्य में इतना आकर्षण हो सकता है. उन्होंने सात हज़ार से ज़्यादा मत हासिल करते हुए संयुक्त अरब अमीरात, फ़्रांस और स्पेन के प्रतिभागियों को भी पीछे छोड़ दिया.

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पुरस्कार लेते समय उन्होंने कहा, "अगर मुझे आख़िरी स्थान मिलता, तो भी मैं निराश नहीं होता."'

पाकिस्तान में 1958 से लेकर अब तक तीन बार तख़्ता पलट हुआ और इसे कई प्रयास असफल भी रहे.

इसके बाद यहां इतने चरमपंथी हैं जो शायद कभी किसी लम्हे में नहीं समझ पाते होंगे कि वे किस संगठन से ताल्लुक रखते हैं और किसके लिए काम करते हैं.

'बाथरूम टेरर'

यहां बिजली कटौती के कारण मयस्सर लंबे अँधेरों से हमें हास्य को विकसित होने का भरपूर मौका मिलता है.

लेकिन 36 वर्षीय हारून ने पाकिस्तानी मुद्दों से संकोच नहीं किया. इस बात का इशारा उनके ताज़ा रचना 'डोंट वरी, बी पाकिस्तानी' में मिलता है.

अपनी एक कॉमेडी 'बॉथरूम टेरर सेल' में वो कहते हैं.

''चरमपंथी समूहों की एक सबसे चर्चित दिनचर्या हमेशा एक ही जगह पर मिलना होता है."

पाकिस्तान में चरमपंथी हैं

पूरे पाकिस्तान चरमपंथी फैले हुए हैं

पाकिस्तान में चरमपंथी हैं.

मुझे इस पर यक़ीन नहीं है! मुझे एक सेकेंड को भी इस पर यक़ीन नहीं होता.

क्योंकि मैं अमरीकी फ़िल्में देखता हूं और जानता हूं कि चरमपंथी कहां मिलते हैं.

चरमपंथी हमेशा ऐसी जगह मिलते हैं जिसे बाथरूम कहते हैं.

हाँ कुछ अजीब सी वजहों जैसे पैसों का लेन-देन,

बम बनाना, संदेहास्पद गतिविधि...हमेशा बाथरूम में होती है.

क्या आपने कभी पाकिस्तान का कोई सार्वजनिक बाथरूम देखा है?

कोई भी चरमपंथी कभी इसके भीतर नहीं गया होगा!"

'मुद्दे ग़ायब नहीं होते'

वह 'पाइपलाइन ऑफ़ पैशन' नामक एक काल्पनिक फ़ोन संवाद में अपनी आवाज़ के बॉलीवुड वाले अंदाज पर हँसते हैं.

इसमें पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और भारत में कांग्रेस पार्टी की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच काल्पनिक संवाद होता है.

इसमें दोनों नेताओं के बारे में कल्पना की गई है कि वे एक-दूसरे को कश्मीर का विवादित क्षेत्र देने वाली बहस में कहते हैं, "....नहीं तुम ले लो कश्मीर."

क्या आप पाकिस्तान में कॉमेडी कर सकते हैं? जब उनसे पूछा जाता है कि क्या वह लोगों की आदतों और नज़रिए का मजाक़ बनाना पसंद करते हैं तो उनका जवाब होता है कि अब यह उनका काम है.

हारून कहते हैं, "मैं कभी झूठ नहीं बोलता! अगर इस तरह की चीज़ें समाज में मौजूद हैं तो मैं उनका मजाक़ बनाता हूं. इन मुद्दों के बारे में बात न करने से वे ग़ायब नहीं हो जाते, वास्तव मे वे अपनी जगह बने रहते हैं."

'...हँसा जा सकता है'

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कराची के रहने वाले हारून कहते हैं, "मैं हर चीज़ के बारे में लिखता हूं. इनमें से कुछ काफ़ी गंभीर हैं, कुछ निजी ज़िंदगी से जुड़ी हुई और कुछ चीज़ें मूर्खतापूर्ण भी हैं..जो मेरे मन पर निर्भर करती हैं."

हारून ने 'ब्लैक फ़िश' नाम से एक कॉमेडी ग्रुप बनाया था धीरे-धीरे लोगों ने इस पर ध्यान देना शुरू किया.

13 साल तक कॉमेडी करने वाले हारून पहले पाकिस्तान में थे, लेकिन अमरीका में इस शो के बाद वह और लोकप्रिय हो गए हैं.

लॉफ़ फ़ैक्ट्री का कहना है कि इस तरह के आयोजन का मक़सद हास्य के माध्यम से शांति और उदारता को बढ़ावा देना है.

इसके लिए हारून को क़रीब 61,000 रूपए (1,000 डॉलर) का पुरस्कार मिला. वह कहते हैं कि इस रक़म से उन्होंने अपनी यात्रा का खर्च पूरा किया.

हारून ने पाकिस्तानियों को भी याद दिलाया है कि यहां कुछ चीज़ें हैं जिन पर हँसा जा सकता है.

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