पुरुषों-महिलाओं में बराबरी: भारत कहाँ है

महिलाओं के राजनीति में सहजता से भाग ले पाने और काम कर पाने के कारण दुनिया में पिछले 10 साल में लैंगिक अंतर घटा है.

विश्व आर्थिक फ़ोरम के वार्षिक लैंगिक सर्वे से पता चला है कि 2005 से अब तक 105 देशों में महिलाओं और परुषों में बराबरी बढ़ी है.

लैंगिक बराबरी के मामले में आइसलैंड छठे वर्ष भी शीर्ष पर है और यमन सर्वे में आख़िरी नंबर पर है.

सभी पहलुओं को ध्यान में लें तो कुल मिलाकर भारत 13 पायदान नीचे ख़िसका और 114वें स्थान पर पहुँच गया है. वह ब्रिक्स देशों में सबसे पीछे है.

राजनीति में लैंगिक बराबरी के हिसाब से भारत 15वें स्थान पर है और अमरीका, ब्रिटेन से आगे है.

दुनिया में लैंगिक अंतर:

विश्व आर्थिक फ़ोर्म ने 142 देशों में आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी के पहलुओं का अध्ययन किया है.

ब्रिटेन आठ स्थान गिरकर दुनिया में 26वे स्थान पर पहुँच गया है और रवांडा इस लिस्ट में पहली बार शामिल होकर 7वें स्थान पर है और इस तरह अफ़्रीकी अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर है.

ब्रिटेन के नीचे खिसकने के पीछे महिलाओं की आमदनी का घटना है. उधर अमरीका तीन स्थान जगह ऊपर गया है और 20वें स्थान पर पहुँचा है.

इस रिपोर्ट की लेखक सादिया ज़ाहिदी के अनुसार रवांडा की सफलता के पीछे कारण यह है कि काम करने के क्षेत्र में और राजनीति में जितने पुरुष हैं, उतनी ही महिलाएँ है.

राजनीति में लैंगिक अंतर:

मात्र छह देशों में - श्रीलंका, माली, क्रोएशिया, मैसिडोनिया, जॉर्डन और ट्यूनिशिया में 2005 के बाद लैंगिक अंतर बढ़ा है.

लेकिन राजनीतिक तौर पर देखें तो भारत 15वें स्थान पर है और इस लिहाज़ से वह अमरीका (54वें स्थान) और ब्रिटेन (33वें स्थान) से आगे है. रिपोर्ट के अनुसार ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में सोनिया गांधी की तरह कई महिला नेता हैं.

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Image caption विभिन्न देशों की संसद में महिलाओं की भागेदीरी
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Image caption विभिन्न देशों के मंत्रियों में महिला मंत्री

पूरी दुनिया में देखें तो महिला सांसदों की संख्या 26 प्रतिशत बढ़ी है और 10 साल पहले के मुकाबले में महिला मंत्रियों की संख्या अब 50 प्रतिशत अधिक है.