ऐसे होगी नागरिकताहीन लोगों की मदद

  • 4 नवंबर 2014
दस सालों में ख़त्म होगी नागरिकताहीनता इमेज कॉपीरइट AFP

शरणार्थी मामलों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएचसीआर एक अभियान के ज़रिए ऐसे लोगों की मदद करना चाहती है जिनके पास किसी भी देश की नागरिकता नहीं है. वह अगले 10 वर्षों में ऐसा करना चाहती है.

ऐसा माना जाता है कि पूरे विश्व में लगभग एक करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास किसी भी देश की नागरिकता और पासपोर्ट नहीं है.

नागरिकता न होने की सूरत में ऐसे लोगों को किसी भी तरह कि स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और वोट करने जैसे राजनीतिक अधिकार से वंचित कर दिया जाता है.

यूएनएचसीआर के मुताबिक़ इसको ख़त्म करने के लिए बिना नागरिकता वाले बच्चों को संबंधित देशों को नागरिकता देनी होगी साथ ही जातीय अल्पसंख्यकों को भी नागरिकता प्रदान करनी होगी.

नागरिकताहीन पीढ़ियां

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जिनेवा से बीबीसी संवाददाता इमोजन फ़ूक्स के अनुसार लोग कई कारणों से नागरिकता खो देते हैं या पा नहीं पाते.

शरणार्थी शिविर में जन्मे बच्चे ना तो उस देश की नागरिकता पाते हैं जहां वे जन्मे हैं और न ही उनके पास अपने अभिभावकों के देश वापस लौटकर वहां की नागरिकता मांगने का कोई रास्ता होता है. ऐसे में बच्चे अक्सर नागरिकताहीन रह जाते हैं.

जातीय अल्पसंख्यकों जैसे बर्मा का रोहिंग्या समुदाय- जिन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया है. इसके साथ ही कई अधिकारों से भी वे वंचित हो गए हैं.

यूएनएचसीआर के अनुसार ऐसे 27 देश हैं जिनमें महिलाओं को मिली नागरिकता उनके बच्चों को नहीं दी जा सकती जिससे कई पीढ़ियां नागरिकता से वंचित रह जाती हैं.

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