मध्यावधि चुनाव: ओबामा की परीक्षा

  • 4 नवंबर 2014
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अमरीका में संसद की उपरी सदन सीनेट की एक तिहाई सीटों और निचली सदन प्रतिनिधि सभा के लिए मंगलवार को मतदान होगा.

वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता जॉन सोपेल के मुताबिक़ इन मध्यावधि चुनावों को राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रदर्शन पर जनमत संग्रह की तरह देखा जा रहा है.

साथ ही इसके नतीजों से यह भी साफ़ हो जाएगा कि साल 2016 में ओबामा का उत्तराधिकारी कौन बनेगा.

लेकिन इन चुनावों में सबकी नज़रें सीनेट पर रहेंगी जहां रिपब्लिकन बहुमत पाने की उम्मीद कर रहे हैं और छह और सीटें पाने से ऐसा कर सकते हैं.

चुनाव अभियान

जॉन सोपेल के मुताबिक यह चुनाव एक ऐसे व्यक्ति के लिए जनमत संग्रह है जिसने चुनाव अभियान में लगभग नहीं के बराबर हिस्सा लिया.

राष्ट्रपति बराक ओबामा देश में इतने अलोकप्रिय हो गए हैं कि लगभग सभी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने उनसे अभियान से दूर रहने की गुज़ारिश की थी.

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छह साल पहले ज़बर्दस्त लोकप्रियता के दम पर सत्ता में आए ओबामा व्हाइट हाउस तक ही सीमित हो कर रह गए हैं.

इससे दो सवाल पैदा होते हैं. पहला यह कि क्या रिपब्लिकन सीनेट पर क़ब्ज़ा करने के लिए ज़रूरी सीटें जुटा पाएंगे. इसके लिए उन्हें छह सीटों की ज़रूरत है.

नीति में बदलाव?

दूसरा सवाल यह कि अगर वे इसमें सफल रहते हैं तो क्या अमरीकी प्रशासन में कोई बदलाव आएगा.

अमरीकी संसद कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच संबंध बहुत अच्छे नहीं रहे और ये ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं.

रिपब्लिकनों के दबदबे वाली कांग्रेस के फ़ैसलों को रोकने के लिए राष्ट्रपति के पास वीटो का विकल्प रह जाएगा.

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Image caption कई प्रांतों में गवर्नर के लिए भी चुनाव हो रहा है.

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' अख़बार के मुताबिक़ इन मध्यावधि चुनावों का प्रचार अमरीका के इतिहास में अब तक का सबसे महंगा रहा लेकिन मतदान को लेकर लोगों में कोई उत्साह नहीं है.

मतदाता

ओबामा के कार्यकाल के अंतिम दो सालों में सरकार को क्या करना चाहिए, इस पर भी मतदाता बंटे नज़र आतें हैं.

अख़बार का कहना है कि चुनावी सर्वेक्षणों को देखें तो कई सीटों पर बेहद क़रीबी मुक़ाबला होगा.

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