ईरानः इन्हें बदलवाना पड़ता है लिंग!

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ईरान उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां समलैंगिक संबंधों की सज़ा मौत है.

हालाँकि धर्मगुरु भी इस दलील को स्वीकार करते हैं कि किसी व्यक्ति के शरीर में ग़लत जननांग हो सकता है.

इसलिए समलैंगिकों को देश से भागने को मजबूर करने के बजाए, उनकी लैंगिक सर्जरी पर ज़ोर दिया जाता है.

ईरान में रहते हुए डोन्या ने अपने सिर पर बाल छोटे रखे और स्कार्फ़ की बजाय टोपी पहनी. वह अपनी माहवारी रोकने के लिए एक डॉक्टर के पास गई.

वह कहती हैं, "मैं बहुत छोटी थी और मैं वास्तव में खुद को नहीं समझ पाई थी. मैंने सोचा कि अगर मैं अपनी माहवारी रोक पाई तो मैं ज़्यादा बलवान बनूंगी."

हार्मोन्स का उपचार

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अगर पुलिसवाले उससे पहचान पत्र मांगते और उन्हें पता चलता कि वह लड़की है तो वह वे उसे झिड़कते हुए कहते "तुम ऐसी क्यों हो? जाओ और अपना लिंग परिवर्तन कराओ."

यह मेरी अभिलाषा बन गई. वह कहती हैं, "मैं इस कदर दबाव में थी कि मैं अपना लिंग परिवर्तन जल्द से जल्द कराना चाहती थी."

सात साल तक डोन्या का हार्मोन्स का उपचार चला. उनकी आवाज़ भारी हो गई और चेहरे पर बाल उग आए.

लेकिन जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए कहा तो उन्होंने अपने उन दोस्तों से बात की जो पहले ऑपरेशन करा चुके थे और उन्हें "बहुत सी दिक्कतें" पेश आई थी.

तो वह सवाल करने लगी कि क्या यह उसके लिए सही है.

लिंग परिवर्तन

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डोन्या कहती हैं, "मैंने आसानी से इंटरनेट तक नहीं पहुंच सकती थी. कई सारे वेबसाइटें भी ब्लॉक थी. मैंने स्वीडन और नॉर्वे में रहने वाले अपने कुछ दोस्तों की मदद से शोध करना शुरू किया."

वह आगे कहती हैं, "मैं खुद को पहले से बेहतर समझने लगी थी....मैं मानने लगी थी कि मैं समलैंगिक हूं और मैं इसमें खुश थी."

लेकिन ईरान में खुलेआम समलैंगिक पुरुष या महिला के रूप में रहना नामुमकिन है.

डोन्या अब 33 साल की हैं. शादी के कुछ ही समय बाद वह तुर्की चली गई और फिर कनाडा, जहां उन्हें शरण मिल चुकी है.

समलैंगिक महिला या पुरुष को ऑपरेशन के ज़रिए लिंग परिवर्तन के लिए मजबूर करना सरकार की आधिकारिक नीति नहीं है.

खुमैनी का फतवा

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1980 के दशक में ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्लाह खुमैनी ने लिंग परिवर्तन की इजाज़त देते हुए एक फतवा जारी किया था.

कहा जाता है कि एक महिला जिसने उन्हें बताया था कि वह पुरुष के शरीर में क़ैद में है, से मुलाक़ात के बाद खुमैनी ने ये फ़तवा जारी किया था.

ईरान के सरकारी अस्पताल में मनोचिकित्सक के रूप मे काम कर रही शबनम (वास्तविक नाम नहीं) बताती हैं कि कुछ समलैंगिकों को अब जबरन लिंग परिवर्तन के लिए ऑपरेशन कराने को कहा जाता है.

डॉक्टर समलैंगिकों से कहते हैं कि वे बीमार हैं और उन्हें उपचार की ज़रूरत है.

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