ट्रैफ़िक में जब कोई बेतहाशा हॉर्न बजाए!

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अलग-अलग देशों में ज़िंदगी जीने के तौर-तरीके एक दूसरे से बहुत अलग होते हैं.

यही बात हमें किसी देश की ओर खींचती भी है और अक्सर यही सवाल चुनौतीपूर्ण बन जाता है कि वहां सफर करने की सूरत में कैसे निबाह करेंगे.

यह मुश्किल तब और बढ़ जाती है जब किसी देश की सड़क, ट्रैफ़िक और गाड़ी चलाने के तौर तरीकों के बारे में सोचना होता है.

आपने ट्रैफिक का शोर सुना होगा, जाम देखा होगा. गाड़ियों के बेवजह के हॉर्न से परेशान हुए होंगे और जल-बुझ रही हेडलाइट्स पर आपकी नज़र गई होगी.

बेतहाशा हॉर्न!

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बीबीसी ऑटो ने इसी मुद्दे पर सवाल जवाब की कम्युनिटी वेबसाइट कोरा डॉटकॉम का जायजा लिया जहां दुनिया भर से लोगों ने ट्रैफ़िक जाम की सूरत में बजने वाले बेतहाशा हॉर्न पर अपनी राय जाहिर की है.

जब भोंपू बजाने की बात आती है तो यह पाया गया है कि दुनिया भर में इसको लेकर लोग उतावले हो जाते हैं, भले ही इसके कारण अलग-अलग ही क्यों न हों.

कोरा डॉटकॉम पर जैन लीडबेटर लिखती हैं, "ब्रिटेन में जब कोई बेतहाशा हॉर्न बजाता है तो इसका मतलब होता है कि ड्राइवर को ट्रैफ़िक से चिढ़ हो रही है और वह जबर्दस्त गुस्से में है."

भारत का हाल

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मुमकिन है कि अमरीकी लोग ट्रैफ़िक की परिस्थिति को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं लेकिन भारत के ड्राइवरों के बारे में यह बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती है.

तमन्ना शेख कहती हैं, "भारत में गाड़ियों के हॉर्न का इस्तेमाल बहुत ही उदारता के साथ किया जाता है." वे लिखती हैं, "ज़रा अनुमान लगाईए कि न्यूयॉर्क जैसे शोर शराबे वाले शहर में अगर हर कोई कैब ड्राइवर की तरह गाड़ी चलाने लगे तो क्या होगा."

इस सूरत में उनका कहना है, "ज्यादातर मामलों में हॉर्न बजाने का मतलब ड्राइवर को अपनी लेन से हटने के लिए या फिर और तेज चलाने के लिए कहना होता है."

सबरीश भारद्वाज इसे कुछ यूं समझाते हैं, "भारतीय सड़कों पर ट्रैफ़िक में हॉर्न बजाना दूसरे ड्राइवरों के साथ बात करने का ज्यादातर बड़ा और कभी कभी तो एकमात्र जरिया होता है."

वे लिखते हैं, "हम चौराहों पर रुकना या रफ्तार धीमी करना पसंद नहीं करते हैं, बस हॉर्न बजाकर या रात में गाड़ी का बीमर चमकाकर आगे बढ़ जाना चाहते हैं."

और हेडलाइट्स?

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लेकिन दुनिया में हर जगह ऐसा नहीं होता है. स्टीवर्ट एल्सॉप दावा करते हैं कि वे दुनिया भर में मोटरसाइकिल चला चुके हैं.

उन्होंने कोरा डॉटकॉम पर लिखा है, "बैंकॉक में तो कभी-कभी घंटों तक ट्रैफ़िक जाम लगा रहता है. भयंकर गर्मी और उमस के माहौल में भी आप किसी को बेवजह भोंपू बजाते हुए नहीं सुनेंगे. जब तक हॉर्न बजाने की वाकई कोई जरूरत न हो, यह बहुत खराब बात मानी जाती है."

जिस तरह से हॉर्न का इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में अलग अलग तौर तरीके देखने को मिलते हैं. उसी तरह दुनिया भर के ड्राइवर हेडलाइट्स का काम सिर्फ सड़कों को रोशन करना नहीं मानते हैं.

ब्रिटेन की सड़कों पर एक ड्राइवर दूसरे ड्राइवर को अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाने के लिए हेडलाइट चमकाता है. वहां यह सरकारी नियम है कि ड्राइवर किसी और काम से हेडलाइट नहीं चमका सकते हैं.

शिष्टाचार

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लेकिन दक्षिण अफ़्रीका में सरकारी नियम इसकी इजाजत देते हैं कि एक ड्राइवर किसी मोड़ पर पहले निकलने के लिए हेडलाइट फ़्लैश कर सकता है.

कोरा डॉटकॉम पर टेरेंस एफ़र लिखते हैं, "हेडलाइट फ़्लैश करने वाली गाड़ी जब आगे निकल जाएगी तो वह शिष्टाचार के तहत इमरजेंसी इंडिकेटर जलाकर वह पीछे वाली गाड़ी शुक्रिया अता करेगी. और पीछे वाली गाड़ी अपनी बीमर ऑन करके इसका जवाब देगी."

ट्रेवर बेस्ट लिखते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में ड्राइवर चेतावनी देने के लिए हेडलाइट फ़्लैश करते हैं. अमरीका में भी यह बात लागू होती है.

इसलिए ख्याल रखें कि जब आप किसी दूसरे देश में हों ड्राइविंग के तौर-तरीके अलग हो सकते हैं.

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