मोदी पर मिला-जुला रुख चीनी मीडिया का

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भारत में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चीनी मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है.

शपथ ग्रहण करने के बाद चीनी मीडिया ने प्रधानमंत्री को एक ऐसा 'नया नेता' करार दिया जो चीन के साथ संबंधों को सुधारने में दिलचस्पी रखता है.

लेकिन बाद में सरकारी मीडिया का रुख़ बदल गया वैसे ही जैसे दिल्ली का व्यवहार चीन को लेकर बदला है.

पिछले महीने वियतनाम के प्रधानमंत्री न्गुएन तान डुंग और नरेंद्र मोदी के बीच दिल्ली में बैठक हुई जिसमें साउथ चाइना सी में तेल की खोज को लेकर सहयोग पर चर्चा हुई.

इस चर्चा के बाद चीनी मीडिया की नज़र बदल गई है.

कुछ मीडिया खबरों में भारत की आलोचना की गई है कि वो चीन को 'विरोधाभासी संकेत' भेज रहा है जिसे ध्यान में रखते हुए चीन को 'अलर्ट रहना चाहिए.'

ग्लोबल टाइम्स के चीनी संस्करण में छपे एक लेख में भारत की आलोचना करते हुए कहा गया है कि वो चीन के प्रति 'दोस्ताना रवैया नहीं' दिखा रहा है.

'भारत का रवैया दोस्ताना नहीं'

यह लेख चीनी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के एक शोधकर्ता ने लिखा है जिसमें कहा गया है कि भारतीय प्रधानमंत्री चीन के साथ मज़बूत रिश्ते की बात करते हैं लेकिन ''भारत चीन के प्रति लगातार जो रवैया रख रहा है वो दोस्ती जैसा नहीं है.''

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लेख में कहा गया है, ''भारत की सेना सीमावर्ती इलाक़ों में लगातार गश्त लगा रही है और वहां निर्माण कार्य चल रहा है. इससे साफ़ है कि वो ये निर्माण चीन को लक्ष्य में रखकर कर रहा है.''

लेख के अनुसार, ''भारत के विदेश मंत्री ने चीन से एक भारत की नीति का सम्मान करने की अपील की है जो कि चीन को ब्लैकमेल करने और दबाव डालने का प्रयास है.''

लेख में ये भी कहा गया है कि भारत जापान और वियतनाम के साथ संबंध मज़बूत कर रहा है.

इसके अनुसार भारत को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी ताकत को लेकर भ्रम है क्योंकि भारत को लगता है कि अमरीका, जापान, वियतनाम और चीन से दोस्ती करने से उसका कद बढ़ा है जबकि ऐसा नहीं है.

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