आईएस के शासन में कैसा है मोसुल में जीवन

  • 17 नवंबर 2014
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इराक़ी शहर मोसुल पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इस साल जून में क़ब्ज़ा कर लिया था. इसके बाद वहां के निवासी जेहादी शासन के तहत आ गए थे.

आईएस के चरमपंथियों ने वहां तेज़ी से इस्लामी क़ानून लागू किया. इसमें बर्बर सज़ाएं, महिलाओं के लिए अलग क़ानून और किसी भी तरह के मतभेद के लिए असहिष्णुता की नीति है.

एक विशेष श्रृंखला के तहत मोसुल के कुछ निवासी अपनी डायरी के ज़रिए बताएंगे कि आईएस के शासन में वे वहां किस तरह रह रहे हैं.

डायरी लिखने वालों की पहचान छिपाने के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं.

14 नवंबर 2014

मायेस

निनवेह (मोसुल प्रांत) में स्कूल खुल गए हैं. लेकिन इस साल पहले जैसी बात नहीं है. आईएस ने छात्रों और स्कूल प्रशासन के लिए बहुत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

शहर के लोगों के लिए 'दुलक़ुरानियन' एक नया नाम है. यह निनवेह में आईएस के शिक्षा विभाग के सबसे बड़े अधिकारी का नाम है.

वह मिस्र के निवासी हैं. उनका पूरा ध्यान स्कूलों में लड़कियों को लड़कों से अलग करना है. उन्होंने लड़के और लड़कियों को अलग-अलग भवनों में जाने का निर्देश दिया है.

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उन्होंने बड़ी लड़कियों को ढीले-ढाले कपड़े पहनने और चेहरा ढंकने को कहा है.

पुरुष अध्यापक लड़कियों को और महिला अध्यापक लड़कों को नहीं पढ़ा सकते हैं.

आईएस ने स्कूली पाठ्यक्रम को भी बदल दिया है. अब किसी कक्षा में शारीरिक शिक्षा नहीं दी जाती है. उसकी जगह जेहादी शिक्षा दी जाती है.

आईएस ने भूगोल और इतिहास की पढ़ाई बंद करा दी है. कला की कक्षाएं बंद कर उनकी जगह अरबी सुलेख का पाठ पढ़ाया जा रहा है.

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Image caption बग़दाद में आयोजित शांति उत्सव में जमा लोग

इसके अलावा स्कूलों में रंगों और रंगीन पेन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है.

पांच नवंबर 2014

नीज़ार

संपादक की टिप्पणी: मोसुल पर आईएस के क़ब्ज़े से पहले यह शहर दुनिया के सबसे पुराने ईसाई समुदायों से में से एक का घर था.

आईएस के आने के बाद उनमें से बहुत से लोग वहां से पलायन कर गए. जो बचे हैं, उन्हें आईएस ने इस्लाम अपनाने, धार्मिक कर देने या क़त्ल का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है.

मोसुल में ईसाइयों के घरों पर आईएस के सदस्यों ने क़ब्ज़ा कर उनमें लूटपाट की. आईएस के लड़ाके उन घरों के सामान का इस तरह प्रयोग करते हैं, जैसा कि वह उनका ही है.

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हमें अपने ईसाई और यज़ीदी दोस्तों को फ़ोन करने में शर्म आती है. मुझे लगता है कि अब मैं उन्हें कभी फ़ोन नहीं कर पाउंगा. मुझे लगता है कि ईसाइयों के ख़िलाफ़ जघन्य अपराध करने वाला या तो मैं था या मेरे परिवार को कोई सदस्य या मेरे दोस्त.

मैंने फ़ैसला किया है कि ईसाइयों को घरों पर क़ब्ज़ा करने वाले आईएस के किसी भी सदस्य से न तो मैं बात करुंगा और न उन्हें सलाम करुंगा.

गठबंधन बलों के हवाई हमलों के दौरान मैंने उनके व्यवहार पर ध्यान दिया. उन लोगों ने तत्काल उन घरों की बत्तियां बुझा दीं जिन पर उन्होंने क़ब्ज़ा किया था. कुछ चोरी की कारों से किसी अज्ञात जगह की ओर रवाना हो गए.

वो हवाई हमले ख़त्म होने के बाद ही लौटे. मेरे एक दोस्त ने उनमें से एक से पूछ लिया, "आप हवाई हमलों के समय भाग क्यों जाते हैं."

इस पर आईएस के सदस्य ने कहा कि उन्हें डर है कि हमले के दौरान ईसाइयों के उन घरों को निशाना बनाया जाएगा जिन पर उन्होंने क़ब्ज़ा कर रखा है.

उन्हें लगता है कि ईसाइयों ने अपने घरों के बारे में गठबंधन बलों को बता दिया है.

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मेरे एक दूसरे दोस्त ने क़ब्ज़ाए गए इन घरों में से एक के पास जाकर यह जानने की कि उसमें हो क्या रहा है. लेकिन वह नाकाम रहा है, क्योंकि आईएस के लोग घर के सभी दरवाज़ों और खिड़कियों को बंद रखते हैं. वे बग़ीचे तक में बात नहीं करते हैं.

मैं और मेरे दोस्तों ने मन्नतें मांगी हैं कि एक बार जब हमारे शहर से यह गंदगी और वीभत्सता ख़त्म हो जाएगी तो हम दुनिया या अपने ईसाई दोस्तों को यह बताने के लिए किसी ईसाई के घर को फिर बसाएंगे कि जिन्होंने ऐसा किया वह धर्म बिल्कुल नहीं है.

24 अक्तूबर 2014

फ़ैसल

इस्लामिक स्टेट को शहर पर क़ब्ज़ा किए हुए चार महीने हो चुके हैं. मैं और मेरा दोस्त अभी भी छिपे हुए हैं.

वह मोसुल के किसी जज के बॉडीगार्ड के रूप में काम करता था. आईएस के क़ब्ज़े के बाद सभी जज भाग गए और मेरे दोस्त को छिपना पड़ा. मेरा दोस्त सड़क पर बहुत अधिक नहीं घूमता है, क्योंकि आईएस के लड़ाके शहरभर में फैले हुए हैं.

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कई बार वो तत्काल चेकपोस्ट बनाकर लोगों के पहचान पत्र की जांच करते हैं. उन्हें उन लोगों की तलाश रहती है, जिनकी आईएस को तलाश है, जैसे पूर्व सुरक्षा या न्यायिक अधिकारी या शहर पर आईएस के क़ब्ज़े से पहले आईएस के किसी सदस्य को गिरफ़्तार करने वाले या सरकारी मुलाज़िम या कोई राजनीतिज्ञ.

आईएस की ओर से दी जाने वाली फांसी से डरकर इनमें से कई लोग भाग गए हैं. इन कार्रवाइयों की वजह से लोग आईएस का समर्थन करने से बचते हैं. इन आपराधिक वारदातों से शांतिप्रिय लोग आतंकित हैं.

आईएस के सदस्यों को सड़कों पर सरेआम कार्यकर्ताओं को फांसी देते हुए देखा जा सकता है. वे लड़ाकों वाले काले कपड़े पहनते हैं. उनके बाल और दाढ़ी बढ़ी हुई हैं, ऐसा लगता है कि काफ़ी समय से वे नहाये नहीं हैं.

प्रतिदिन उनकी संख्या बढ़ती जा रही है. वे नई जगहों पर क़ब्ज़ा कर और अपनी मौज़ूदगी बढ़ा रहे हैं. वे गठबंधनों बलों के हवाई हमलों के आगे अडिग हैं. इन हमलों से ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं बदल रहा है.

मायेस

मैं अपने प्यारे शहर मोसुल के एक स्कूल में पढ़ाती हूं. अन्य इराक़ी माँओं की तरह मैं अपने पति को थोड़ा आर्थिक सहायता देने के लिए काम करती हूँ.

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इस साल गर्मी की छुट्टियां शुरू होने पर मैंने कुछ रिश्तेदारों और परिजनों से मिलने और एक पारिवारिक आयोजन में शामिल होने के लिए बग़दाद जाने का फैसला किया.

वहां पार्टी ख़त्म होने के बाद मुझे मोसुल में कर्फ्यू लगने और सरकारी सुरक्षा बलों और इस्लामिक स्टेट के बीच लड़ाई छिड़ने की ख़बर मिली.

उसके बाद मैं हर दिन अपने पति को फ़ोन करके वहां का हालचाल पूछती थी.

दहशत और खलबली

मैंने अपने जीवन के सबसे बुरे दिन बग़दाद में गुजारे, जो कि मेरे बचपन की मासूमियत और जवानी के सपनों का शहर था. शादी के बाद मोसुल जाने से पहले मैं बगद़ाद में रहने को लेकर रोमांचित रहती थी.

मोसुल में पांच दिन तक चली लड़ाई के कारण मैं बग़दाद में आतंकित और भयभीत रही. मुझे अपने पति की चिंता हो रही थी. मैं लगातार यह सोचा करती थी कि वहां क्या होगा और मैं अपने पति के साथ फिर कब होउंगी.

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मोसुल में सुन्नी विद्रोहियों और आईएस लड़ाकों के आने के बाद मैं और मेरे पति शहर में वापसी की योजना बनाने लगे. लेकिन सभी सड़कें अभी भी बंद हैं, क्योंकि लड़ाई बग़दाद और मोसुल के बीच हो रही है.

कुछ प्रयासों और मेरे पति के कुछ संपर्कों के जरिए हम किसी तरह बग़दाद से उत्तर के लिए हवाई टिकट लेने में सफल रहे. लेकिन हमारे सामने एक दूसरी समस्या आ खड़ी हुई, मेरे पास अपने बच्चों के दस्तावेज़ नहीं थे. सड़क मार्ग से यात्रा करने की वजह से उन्हें मैं अपने साथ नहीं ला पाई थी. उड़ान के लिए ये दस्तावेज़ बहुत ज़रूरी हैं.

ये दस्तावेज़ हमें एक दोस्त के जरिए मिले जो कि कार से मोसुल से बग़दाद आ रहा था.

मैं 20 जून की आधी रात के बाद मैं मोसुल में अपने घर पहुँची. मोसुल की सड़कों पर हथियारबंद दस्तों को गश्त लगाते देखे मैं चौंक गई. यह देख मैंने प्रार्थना की और तीन दिन तक व्रत रखा.

मैं कुछ समय घर पर रहकर स्थितियों से सामंजस्य बिठाया. लेकिन उन पलों को मैं कभी भी भूल नहीं पाउंगी.

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