श्रीलंका और नॉर्वे के बीच राजनयिक विवाद

महिंदा राजपक्षे और एरिक सोलहिम इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और नॉर्वे के पूर्व शांति दूत एरिक सोलहिम (फ़ाइल फ़ोटो)

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने शनिवार को कहा कि उनके पास इस बात के सुबूत हैं कि नॉर्वे के पूर्व शांति दूत एरिक सोलहिम ने लिबरेशन ऑफ तमिल टाइगर्स (लिट्टे) की धन देकर मदद की थी.

राजपक्षे का ये बयान सोलहिम की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि वे श्रीलंका में कथित गृहयुद्ध पर ग़वाही देने के इच्छुक हैं.

लिट्टे को धन देकर मदद वाले राजपक्षे के इस बयान के साथ ही श्रीलंका और नॉर्वे के बीच राजनयिक विवाद शुरू हो गया है.

राष्ट्रपति चुनाव

Image caption गृहयुद्ध के दौरान तमिल टाइगर्स और सरकार दोनों पर युद्ध अपराध के आरोप लगे.

सोलहिम ने कहा है कि राजपक्षे उनके बारे में झूठ कह रहे हैं और उनकी नज़र अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर है.

श्रीलंका में अगले वर्ष जनवरी में राष्ट्रपति चुनाव हो सकते हैं.

नॉर्वे ने एक दशक पहले श्रीलंका और तमिल टाइगर्स के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. ये बातचीत विफल रही थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार