सुरक्षा परिषद में महिलाओं की बढ़ती भूमिका

  • 17 नवंबर 2014
सुरक्षा परिषद
Image caption संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अब महिलाओं की तादाद एक तिहाई से ज़्यादा हो गई है.

लंबे समय तक पुरुषों के दबदबे वाले सुरक्षा परिषद में अब रिकॉर्ड संख्या में महिलाएं हैं. क्या इसका असर उच्च स्तरीय कूटनीति पर भी पड़ेगा?

जब मैडेलीन अलब्राइट ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि के रूप में काम किया था तो वो अक्सर जी-7 के बारे में बातें करती थीं.

यह दुनिया के सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले सात देशों के क्लब का नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र में गिनीचुनी महिला राजदूतों का ज़िक्र था. 1990 के शुरुआती दशक में अलब्राइट ने इस समूह को अनौपचारिक रूप से इकट्ठा किया.

आज संयुक्त राष्ट्र में 31 महिलाएं स्थायी प्रतिनिधि हैं और सुरक्षा परिषद में छह सीटों पर महिलाएं हैं, जो अर्जेंटीना, जॉर्डन, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, नाइजीरिया और अमरीका से आती हैं.

संयुक्त राष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण निकाय में महिलाओं की यह उपस्थिति भी एक रिकॉर्ड है.

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Image caption समंथा पावर कहती हैं, "मैंने गौर किया है कि महिलाएं अधिक ध्यान से सुनती हैं और अधिक नोट्स लेती हैं."

परिषद की एक महिला सदस्या हैं अमरीकी राजदूत समंथा पावर. वर्ष 2010 में इसमें केवल तीन महिलाएं थीं. इसी वर्ष महिलाओं की संख्या पांच तक पहुंची, जो परिषद के कुल सदस्यों का एक तिहाई है.

महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय मैत्री

नाइजीरिया की पूर्व विदेश मंत्री रहीं राजदूत जोय ओगवू भी समंथा पावर की तरह महिला सदस्यों में अंतरराष्ट्रीय मैत्री का भाव देखती हैं.

जोय कहती हैं, "किसी समस्या को हल करने में महिलाओं की अंतरदृष्टि काफ़ी गहरी होती है."

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Image caption दीना कवर (दाएं) का मानना है कि महिला राजदूत अपने पुरुष सहकर्मियों की अपेक्षा सबसे अलग दृष्टिकोण अपनाती हैं.

जॉर्डन की दीना कवर भी परिषद की स्थायी प्रतिनिधि हैं. लक्ज़मबर्ग की राजदूत सिल्वी लूकास पूरी दुनिया में शांति स्थापित करने के काम को लेकर महिलाओं की सहभागिता की ज़रूरत पर लगातार बल देती हैं.

संवेदनशील

जब इन महिला सदस्यों ने सीरियाई महिलाओं से मुलाकात की थी तो अर्जेंटीना की राजदूत मारिया क्रिस्टिना पर्सेवल ने उनसे अपने देश की उन मांओं के बारे में ज़िक्र किया, जिनके बेटे सैन्य शासन के दौरान गायब हो गए थे.

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Image caption संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नाइजीरिया की राजदूत जोय ओगवू.

उन्होंने इस आंदोलन के चिह्न के रूप में सफ़ेद स्कार्फ़ दिया.

लिथुआनिया की राजदूत रायमोंडा मुर्मोकैट यूक्रेन से क्राइमिया को अलग करने पर रूस की सबसे कड़ी आलोचक रही हैं तो समंथा पावर अपने रूसी समकक्ष, विटेली चुर्किन की कड़ी आलोचना करती रहती हैं.

महत्वपूर्ण पद

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Image caption अर्जेंटिना की राजदूत मारिया क्रिस्टिना पर्सवेल.

अब स्थिति ये है कि परिषद की पांच में चार स्थायी सदस्यों के रिक्त स्थान पर महिलाओं को वरिष्ठ राजदूत बनाया जाना है.

परिषद में अब तक चार महिलाओं ने अमरीका की ओर से प्रतिनिधित्व किया है- जीन किर्कपैट्रिक, मैडेलीन अलब्राइट, सुज़ैन राइस और अब समंथा पावर.

पूरे संयुक्त राष्ट्र में अब महिलाएं अधिक महत्वपूर्ण पदों पर ज़िम्मेदारी सम्भाल रही हैं. पूर्व ब्रिटिश मंत्री वैलेरी एमोस मानवीय सहायता की प्रमुख हैं.

जर्मनी की एंजेला केन निःशस्त्रीकरण मामले की संयुक्त राष्ट्र सबसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधि हैं. उन्होंने सीरिया के रासायनिक हथियार ख़त्म करने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

महिला कमांडर

Image caption अभी भी संयुक्त राष्ट्र में 84 प्रतिशत राजदूत पुरुष हैं लेकिन महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

डच राजदूत सिग्रिड काग ने इन हथियारों को नष्ट करने के काम की निगरानी की. विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख डॉ. मार्गरेट चान हैं.

पिछले अगस्त में मेजर जनरल क्रिस्टीन लुंड संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा बल की पहली महिला कमांडर बनीं.

हालांकि अभी भी सबसे महत्वपूर्ण जगहों पर पुरुषों का दबदबा है लेकिन 2016 में जब बान-की मून का कार्यकाल पूरा होगा तो सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों पर यह नैतिक दबाव होगा कि वो इस पद के लिए महिला को चुनें.

लेकिन यह अभी दूर की कौड़ी नज़र आती है. अभी भी संयुक्त राष्ट्र में 84 प्रतिशत राजदूत पुरुष हैं.

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