2013 में दोगुनी हुईं आतंकवादी हमलों में मौतें

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी हमलों में होने वाली मौतों में वर्ष 2012 से 2013 के बीच 61 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है.

ग्लोबल टेरेरिज़्म इंडेक्स 2013 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2013 में क़रीब 10,000 आतंकवादी हमले हुए. यह आंकड़ा वर्ष 2012 के मुक़ाबले 44 प्रतिशत अधिक है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मौतों में अधिकांश के पीछे इस्लामिक स्टेट, अल-क़ायदा, बोको हराम और तालिबान जैसे चरमपंथी संगठनों का हाथ है.

रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित इराक़ है. भारत विश्व का छठा प्रभावित देश है.

हेलियर शेउंग की रिपोर्ट

Image caption ग्लोबल टेररिज़्म इंडेक्स के अनुसार, मध्यपूर्व के देशों में भारी हिंसा ने बढ़ा मौतों का आंकड़ा.

इस रिपोर्ट को इंस्टीट्यूट फ़ॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस ने तैयार किया है जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2013 में आतंकवादी हमलों में क़रीब 18 हज़ार लोग मारे गए.

इंस्टीट्यूट के कार्यकारी अध्यक्ष स्टीव किलेली ने बीबीसी को बताया कि मौतों में हुई यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सीरिया में गृह युद्ध के कारण आई है.

रिपोर्ट में 2000 से 2013 के बीच अमरीका स्थित ग्लोबल टेरेरिज़्म के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है.

इसमें आतंकवादी हमलों, मौतों, घायलों और संपत्ति के नुकसान के आधार पर देशों की रैंकिंग की गई है.

वर्ष 2013 में 80 प्रतिशत मौतें इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, नाइजीरिया और सीरिया में हुईं.

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इसके बाद भारत, सोमालिया, फिलीपींस, यमन और थाईलैंड का नंबर है.

रिपोर्ट के अनुसार, आर्गेनाइजेशन फ़ॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के देशों में वर्ष 2000 से आतंकवादी हमलों में होने वाली मौतों का आंकड़ा केवल पांच प्रतिशत है.

इन आंकड़ों में 11 सितंबर 2001 का अमरीका पर हमला, 2004 में मैड्रिड ट्रेन में विस्फोट, 2005 में लंदन में विस्फोट और 2012 में नॉर्वे में विस्फोट और फ़ायरिंग भी शामिल हैं.

कट्टर विचारधारा

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रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2013 में हुई कुल 66 प्रतिशत मौतों के लिए चार संगठन ज़िम्मेदार हैं- अल-क़ायदा, तालिबान, बोको हराम और इस्लामिक स्टेट.

नाइजीरिया में चरमपंथ में बढ़ोतरी बोको हराम के कारण हो सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक चारों संगठनों ने वहाबी इस्लाम की कट्टरपंथी व्याख्या के रूप में धार्मिक विचारधारा का इस्तेमाल किया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक कट्टरपंथ पर अंकुश लगाने के लिए उदार सुन्नी विचारधारा को बढ़ावा देने की ज़रूरत है और यह कार्य उदार सुन्नी देशों को करना चाहिए न कि बाहर से किया जाना चाहिए.

हालांकि इसमें कहा गया है कि आतंक के लिए प्रेरणा केवल धार्मिक विचारधारा से ही नहीं मिल रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि क़तर, यूएई और कुवैत जैसे मुस्लिम बहुल देशों में शांति इशारा करती है कि अन्य सामाजिक, राजनीतिक और भूराजनीतिक कारकों की भी इसमें भूमिका है.

भारत

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रिपोर्ट में चरमपंथी घटनाओं में भारत में हुई कुल मौतों में आधे का कारण माओवादी हिंसा बताया गया है. कुल 162 देशों में से भारत छठा प्रभावित देश है.

भारत में कुल 634 आंतकवाद से जुड़ी घटनाएँ हुईं जिसमें 404 लोग हताहत हुए

इंस्टीट्यूट फ़ॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के कार्यकारी अध्यक्ष स्टीव किलेली के अऩुसार, कुछ उदार सुन्नी देशों में धर्मगुरु पहले से ही हिंसा की मुख़ालफ़त कर रहे हैं

उन्होंने कहा कि कट्टर धार्मिक विचारधारा पर अंकुश लगाना पश्चिमी देशों के लिए बहुत ही मुश्किल है.

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