आईएस क्यों भा रहा है फ़्रांसीसियों को?

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Image caption मैक्सिम ओ-शार (दाएं) ने 17 वर्ष की उम्र में ही इस्लाम धर्म अपना लिया था.

फ़्रांस के युवाओं में चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रति बढ़ता आकर्षण फ़्रांस सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है.

सरकार ने इस ख़तरे से निपटने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं. ऐसे युवाओं को मनोवैज्ञानिक परामर्श देने से लेकर उनके पासपोर्ट ज़ब्त करने तक की कार्रवाई की जा रही है.

लेकिन एक अनुमान के मुताबिक़ एक हज़ार फ्रांसीसी नागरिक या तो आईएस में शामिल हो चुके हैं, या रास्ते में हैं, या शामिल होने का मन बना रहे हैं.

आख़िर फ्रांसीसी युवाओं में आईएस में शामिल होने का इतना क्रेज़ क्यों है?

विस्तार से पढ़ें लूसी विलियम्सन की रिपोर्ट

सिर क़लम किए जाने के हालिया स्लामिक स्टेट के वीडियो में दिख रहे दो फ्रांसीसी नागरिकों की पहचान के बाद फ़्रांस में इस बात पर बहस तेज़ हो गई है कि क्यों युवा आईएस में शामिल हो रहे हैं और कैसे उन्हें रोका जाए.

मैक्सिम ओ-शार (22) ने सीरियाई ज़मीन पर हत्या करने में मदद की थी.

मैक्सिम के चाचा पास्कल हाउशार्ड के अनुसार, "कभी वो एक शांत और ख़ुश लड़का था. यहां तक कि बचपन में भी वो नटखट नहीं था."

छोटे क़स्बे के युवा

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Image caption पिछले अक्टूबर में एक वीडियो में माइकल डोस सेंटोस दिखे, जिसमें उन्होंने फ़्रांस से बदला लेने का आह्वान किया था.

लेकिन इस सप्ताह वो पश्चिमी देशों से आए उन सदस्यों में नया नाम बन गए हैं, जो आईएस के साथ मिलकर लड़ाई कर रहे हैं.

उन्होंने पहले ही फ्रांसीसी टेलीविज़न को स्काइप के मार्फ़्त साक्षात्कार दिया था. इसमें उन्होंने सीरियाई ज़िंदगी और अपने शहीद होने की इच्छा के बारे में बताया था.

मैक्सिम फ्रांस के ग्रामीण इलाक़े नार्मेंडी के रहने वाले हैं और स्थानीय ख़बरों के अऩुसार, सत्रह वर्ष की उम्र में ही इस्लाम धर्म क़ुबूल कर लिया था.

अभियोजकों ने फ़्रांस के जिस दूसरे नागरिक माइकेल डास सैंटोस (22) का ज़िक्र किया है वो पेरिस के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक छोटे से क़स्बे से आते हैं.

स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल अफ़ेयर्स के प्रोफ़ेसर जीन-पियरे फ़िलू कहते हैं, "चरमपंथी संगठन के लिए पश्चिम से आने वाले नए रंगरूट सैन्य कार्रवाईयों के लिए उपयोगी नहीं होते हैं. उनका इस्तेमाल प्रचार और भर्ती के लिए होता है. चरमपंथी नेता यूरोपीय मुस्लिमों को अपने मक़सद के लिए बंधक के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं, ताकि एक क़िस्म का डर पैदा हो. और उनकी यह तरकीब काम कर रही है."

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हालिया वीडियो पर फ़्रांस के राष्ट्रपित फ़्रांसुआ ओलांद ने कहा था कि फ़्रांसीसी परिवारों को चरमपंथी भर्ती के ख़तरे से आगाह करने के लिए और बहुत किया जाना चाहिए.

ऐसा दिख रहा है कि फ़्रांस से आईएस की ओर आकर्षित लोगों में अधिकांश धर्म परिवर्तन वाले हैं.

फ़्रांसीसी संस्थान सीपीडीएसआई के एक ताज़ा सर्वेक्षण में पाया गया है कि कट्टर इस्लामिक मत अपनाने वाले 90 प्रतिशत लोगों के दादा-दादी फ्रांसीसी थे और 80 प्रतिशत नास्तिक परिवारों से आते हैं.

जिहादी भर्ती के ख़तरे से पार पाने के लिए बनाई गई सरकारी हेल्पलाइन पर आने वाले आधे फ़ोन ग़ैर-मुस्लिम और ग़ैर-अरब पृष्ठभूमि के परिवारों से आते हैं.

आकर्षण

इस मामले पर सरकार द्वारा गठित डी-रेडिकलाइज़ेशन टीम के सदस्य पियेर एन-गान कहते हैं, "क़ानून से परेशान एक आदती अपराधी, जिसे सेना से निकाल दिया गया या एक युवा छात्र, जो पहले से ही एकाकी है- भावुकता के क्षणों में ऐसे समूह के सम्पर्क में आ जाते हैं."

प्रोफ़ेसर फ़िलियू ने बीबीसी को बताया, "कोई भी नए रंगरूट को पहले नृशंश बनाया जाता है और फ़िर फ़ेसबुक के मार्फ़त चार या पांच दोस्तों को भर्ती करने का दबाव डाला जाता है."

वो बताते हैं, "अगर घर पर भेजी गई उनकी तस्वीरों को देखें तो ये सब पिज़्ज़ा और बंदूक़ों और यूफ़्रेटस के पार डूबते सूरज की होती हैं. यह एक प्रस्ताव होता है 'विजेताओं' के साथ आने का. प्रसिद्धि पाने की चाहत रखने वाला हर कोई जानता है कि यदि वो चला जाता है और किसी बंधक का क़त्ल कर देता है तो वो स्टार बन जाएगा और अपने देश के सारे अख़बारों के मुख्य पृष्ठ पर छा जाएगा."

धर्मपरिवर्तन

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Image caption डोस सैंटोस फ़्रांस के एक छोटे से कस्बे के रहने वाले हैं.

पियेरे एन-गान कहते हैं, "कट्टर इस्लाम स्वीकार करना इस्लाम स्वीकार करने से अलग है. वे मस्जिद से होकर नहीं जाते. ये टूटे हुए लोग हैं और ये इस्लाम के कट्टरपंथी नज़रिये से प्रभावित हो जाते हैं और वास्तव में अन्य किसी क़िस्म का साम्प्रदायिक संगठन भी यही करता. सबसे बड़ा आकर्षण वह है जो उन्हें पश्चिमी देशों के पीड़ित के रूप में पहचान देता है."

"उन्हें बताया जाता है कि वे ख़ास हैं और उन्हें ईश्वर द्वारा चुना गया है."

लगभग पूरी तरह फ़ेसबुक या अन्य इंटरनेट वेबसाइटों से होने वाली इस भर्ती पर इमामों और मस्जिदों का बहुत थोड़ा प्रभाव होता है.

इतने नज़दीकी संबंधों और इतनी अपीलों का ऐसे नेटवर्क से निपटने के मामले में बहुत कम तरकीबें हैं.

कुछ लोग इसके लिए फ़्रांस की सामाजिक ग़ैरबराबरी को इसका ज़िम्मेदार मानते हैं लेकिन सर्वेक्षण बताते हैं कि अधिकांश रंगरूट बहुत ही एकजुट और मध्यवर्गीय परिवार से आते हैं.

कार्यक्रम

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Image caption ताज़ा वीडियो में आईएस में शामिल फ़्रांसीसी लड़ाके भी दिखे.

ऐसे एक हज़ार से अधिक फ्रांसीसी नागरिक हैं जो या तो आईएस जैसे संगठन के साथ मिलकर लड़ रहे हैं या रास्ते में हैं या इसकी योजना बना रहे हैं या फ़्रांस लौट रहे हैं.

इसे लेकर सरकार काफ़ी दबाव में है. सरकार ने इस तरह के ख़तरे से निपटने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किया है.

अभी हाल ही में ऐसे लोगों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायाता देने का एक कार्यक्रम शुरू किया गया है जो फ़्रांस छोड़कर इस संगठन में शामिल होना चाह रहे हैं.

प्रोफ़ेसर फ़िलियू का मानना है कि यह भर्ती अभियान इंटरनेट का सबसे सरल और सबसे प्रभावी प्रचार का तरीक़ा बन गया है. इससे निपटने का सबसे सही तरीक़ा यही है कि क़त्ल के वीडियो और इस्लामिक चिन्हों में यूरोपीय चेहरों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए और पीड़ितों पर ध्यान देना चाहिए.

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