दोस्त के लिए कसरत

बिल सॉवरी, ऑस्ट्रेलिया के डिफ़ेंस अटाशे

लंदन में इन दिनों ऐतिहासिक महत्व की जगहों पर अक्सर मंझले क़द का एक इंसान पुश अप लगाते हुए दिख जाता है.

ये व्यक्ति ब्रिटेन में ऑस्ट्रेलिया के डिफ़ेंस अटाचे बिल सॉवरी हैं.

लंदन में भव्य ऑस्ट्रेलिया हाउस में ब्रिगेडियर सॉवरी से जब मेरी मुलाक़ात हुई तो ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि सूट-बूट में सजा धजा ये इंसान अपने भारतीय दोस्त के बेटे के लिए रोज़ क़रीब हज़ार पुशअप लगा रहा है.

ब्रिगेडियर सॉवरी पैसे इकट्ठा करने के लिए पुश अप लगाते हैं और लोगों से एक वेबसाइट पर दान देने की अपील करते हैं.

उन्होंने लक्ष्य रखा है 23 दिन में टूर डी फ़्रांस के हर किलोमीटर के बदले चार पुश अप लगाने का. यानी 3660 किलोमीटर की रेस के लिए क़रीब 15 हज़ार पुश अप.

Image caption बिल सॉवरी और मोहित विग की मुलाकात डिफ़ेंस स्टाफ़ कॉलेज में हुई थी.

वो इससे 25,000 हज़ार पाउंड यानी क़रीब 25 लाख रुपए इकट्ठा करना चाहते हैं.

52 साल की उम्र, रोज़ाना हज़ार पुश अप

ये पूछने पर कि क्या पुश अप लगाने का चैलेंज लेना मुश्किल था?

उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि किसी नेक काम के लिए कोई चैलेंज लेना मुश्किल है लेकिन 52 साल की उम्र में मुझे ये सोचना था कि मैं क्या करूं. मैं अच्छा रनर तो नहीं रहा लेकिन मज़बूत ज़रूर था.''

ब्रिगेडियर सॉवरी और भारतीय सेना में मेजर रहे मोहित विग की मुलाक़ात तमिलनाडु के डिफ़ेंस स्टाफ़ कॉलेज में हुई थी.

इसके बाद ब्रिगेडियर सॉवरी वापस ऑस्ट्रेलिया चले गए और मेजर विग की तैनाती भारत प्रशासित कश्मीर में हुई जहां एक धमाके में उनकी जान चली गई. मेजर विग और ब्रिगेडियर सॉवरी के बीच चिट्ठियों के ज़रिए बात होती थी लेकिन धीरे-धीरे वो भी नाता टूट गया.

कई साल बाद सॉवरी को फ़ेसबुक के ज़रिए विग के बेटे फ़तेह की बीमारी के बारे में पता चला.

17 साल के फ़तेह को स्पाइनो बिफ़ुडा है और वो पूरी तरह चल नहीं सकते. पुश अप फ़ॉर फ़तेह चैलेंज से जो रक़म मिलेगी उससे फ़तेह का ऑस्ट्रेलिया में इलाज हो सकेगा.

'आत्मनिर्भर हो सकेगा फ़तेह'

ब्रिगेडियर सॉवरी कहते हैं कि फ़तेह अपनी मां पर निर्भर न रहे इसके लिए ज़रूरी है कि उसे कुछ और स्किल मिले.

मेजर विग की पत्नी टीना ने इंटरव्यू देने से मना कर दिया लेकिन उन्होंने एक बयान ज़रूर जारी किया है.

उन्होंने कहा है, ''बिल ने जो शुरुआत की है वो उनकी गंभीरता के बारे में काफ़ी कुछ बताती है. हम नहीं जानते कि उनका किन शब्दों में शुक्रिया अदा करें. इससे फ़तेह को आत्मनिर्भर होने में जो मदद मिलेगी उसे बयां नहीं किया जा सकता. मुझे उम्मीद है कि पूरी दुनिया में सैनिकों की विधवाओं को ऐसा ही समर्थन मिलेगा."

ब्रिगेडियर सॉवरी अपने इस अभियान को थोड़ा आगे ले जाना चाहते हैं.

वो हर साल ये इवेंट कर उन भारतीय सैनिकों के परिवारों की मदद करना चाहते हैं जो ड्यूटी निभाते हुए ज़ख़्मी हुए या मारे गए.

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