ओबामा की घोषणा से लाखों भारतीयों का 'फ़ायदा'

  • 21 नवंबर 2014
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राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीकी आप्रवासन क़ानून में बदलावों की घोषणा की है जिनसे अमरीका में ग़ैरकानूनी तरीके से रह रहे भारतीयों की ज़िंदगी भी बदल सकती है.

ओबामा ने आप्रवासन नीति में बदलाव की घोषणा करते हुए कहा है कि ग़ैरक़ानूनी तरीके से अमरीका में रह रहे लगभग 50 लाख लोगों को अस्थायी दस्तावेज़ दिए जाएँगे जिससे वे क़ानूनी तरीके से वहाँ रह सकेंगे.

वैसे तो ग़ैरक़ानूनी तरीके से यहां रह रहे लोगों में सबसे ज़्यादा आबादी मैक्सिको से आए लोगों की है.

लेकिन इसी हफ़्ते जारी प्यू रिसर्च संगठन की ऐसे लोगों पर एक रिपोर्ट के अनुसार अमरीका के 50 में से 28 राज्यों में भारत का स्थान भी काफ़ी ऊपर है.

प्यू रिसर्च संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मैक्सिको के बाद के उन पांच देशों में शामिल है जहां के लोग सबसे ज़्यादा संख्या में ग़ैरकानूनी तरीके से यहां रह रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार ऐसे भारतीयों की संख्या साढ़े चार लाख है और निश्चित तौर पर नई घोषणाओं का उन पर असर होगा.

विस्तार प्यू रिपोर्ट और भारतीय पर असर

उच्च श्रेणी की नौकरियां

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भारत को एल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हॉन्डूरास और चीन जैसे देशों की श्रेणी में रखा गया है जहाँ से ग़ैरकानूनी तरीके से लोग आए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार ग़ैरकानूनी तरीके से यहां रह रहे भारतीयों की सबसे बड़ी तादाद न्यू हैंपशर राज्य में है.

इसमें ये भी कहा गया है 2012 तक के आंकड़ों के अनुसार ऐसे ग़ैरकानूनी लोगों की कुल संख्या में से चार प्रतिशत भारतीयों की है.

आप्रवासन मामलों पर काम कर रहे जानकारों का कहना है कि भारत से आए इस तरह के लोगों पर नज़र कम जाती है क्योंकि भारतीय आप्रवासियों में बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं यहां जो पढ़े-लिखे और उच्च श्रेणी की नौकरियों में हैं.

पढ़े-लिखे और उच्च श्रेणी की नौकरियों में लगे लोगों की संख्या लगभग तीस लाख बताई जाती है.

'सामूहिक क्षमादान'

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हाल ही में पंजाब से यहां ग्वाटेमाला के रास्ते से आए लगभग चालीस भारतीयों को गिरफ़्तार किया गया था और उन्हें उनके मामले की सुनवाई तक टेक्सास में एक जेलनुमा जगह पर रखा गया है.

ओबामा के इस नीतिगत बदलाव के तहत ग़ैरक़ानूनी तरीके से यहां रह रहे लगभग पचास लाख लोगों को क़ानूनी तरीके से रहने का अधिकार मिल सकेगा.

वो नागरिकता मिलने वालों की कतार में सबसे पीछे रहेंगे लेकिन उन्हें तब तक जबरन वापस नहीं भेजा जाएगा जब तक ये साबित न हो जाए कि वो किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल थे.

ओबामा के इस एलान का रिपब्लिकंस भारी विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस "सामूहिक क्षमादान" से दूसरों को ग़ैरकानूनी रास्ता अपनाने का प्रोत्साहन मिलेगा.

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Image caption ओबामा ने अमरीका के 50 लाख अवैध प्रवासियों को राहत दी है.

ओबामा ने इस विरोध का जवाब देते हुए कहा है कि उनके इस एलान के बाद जो संसाधन ग़ैरकानूनी तरीके से रह रहे लोगों की धर-पकड़ या उन्हें जबरन वापस भेजने में इस्तेमाल होते हैं उन्हें अमरीकी सीमाओं को और मज़बूत बनाने में लगाया जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि इस संसाधन का इस्तेमाल अवैध तरीके से घुसने की कोशिश कर रहे लोगों को रोकने में भी किया जा सकेगा.

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