नेपाल: मोदी का जनकपुर दौरा रद्द

नरेंद्र मोदी इमेज कॉपीरइट AP

सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नेपाल जा रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनकपुर दौरा रद्द हो गया है.

मोदी 26 से 27 नवंबर तक चलने वाले 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने 25 नवंबर को नेपाल जा रहे थे.

यात्रा में वह जनकपुर, लुंबिनी और मुक्तिनाथ जाने वाले थे.

तो क्या इसका असर शिखर सम्मेलन और भारत-नेपाल संबंधों पर पड़ेगा?

पढ़ें विनीत खरे की पूरी रिपोर्ट

काठमांडू में वरिष्ठ पत्रकार युबराज घिमिरे कहते हैं कि मोदी की जनकपुर यात्रा रद्द होने के राजनीतिक परिणाम सार्क बैठक के बाद सामने आएंगे और परिणाम सुखद नहीं होंगे.

Image caption नेपाल में सुरक्षा एजेंसियां सार्क सम्मेलन में व्यस्त हैं.

हालांकि ये परिणाम क्या होंगे वह यह नहीं बताते.

भारत में आधिकारिक तौर पर मोदी की यात्रा रद्द होने का कारण भारत में उनका व्यस्त कार्यक्रम बताया गया है और कहा गया है कि मोदी भविष्य में इन तीनों जगहों की यात्रा करेंगे.

विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरीक़े से इस दौरे का आयोजन करने पर चर्चा हुई और फिर उसे रद्द किया गया, उससे नेपाल को शर्मिंदगी हुई है.

नेपाल में सवाल पूछे जा रहे हैं कि नेपाल क्यों ऐसे देश के प्रधानमंत्री की यात्रा ठीक से हैंडल नहीं कर पाया, जो नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

कहा जा रहा है कि मोदी उनकी जनसभा को लेकर कुछ स्थानीय दलों के विरोध को लेकर भी ख़ुश नहीं थे.

संबंध

इमेज कॉपीरइट AFP

नेपाल में कुछ लोग सवाल उठा रहे थे कि जब मोदी सार्क बैठक के लिए काठमांडू आ रहे हैं तो वह जनकपुर जाकर आम लोगों को क्यों संबोधित करेंगे.

साथ ही नेपाल सरकार में मोदी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता थी क्योंकि उस दौरान ज़्यादातर सुरक्षाकर्मी काठमांडू में तैनात रहेंगे.

मोदी अगस्त में नेपाल आए थे. इसके बाद स्थानीय लोगों में उनकी जनकपुर यात्रा को लेकर बहुत उत्साह था.

नेपाल के एक सरकारी अधिकारी की मानें तो उनकी अगस्त यात्रा ने भारत-नेपाल संबंधों को नई दिशा दी थी.

Image caption स्थानीय पत्रकार युबराज घिमिरे.

युबराज घिमिरे कहते हैं, "यात्रा रद्द होना नेपाल सरकार के भीतर, नेपाल सरकार और भारतीय दूतावास के बीच समन्वय की कमी को दिखाता है."

काठमांडू में सवाल उठ रहे हैं कि जब मोदी की यात्रा को लेकर इतनी अनिश्चितता थी, तो जनकपुर में स्वागत की इतनी तैयारियां क्यों की गईं.

युबराज घिमिरे बताते हैं, "नेपाल के एक मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने नेपाल सरकार को लिखा है कि मोदी की यात्रा नहीं होगी. मंत्री ने इसके लिए 22 पार्टियों के गठबंधन पर आरोप लगाया था. 24 घंटे के बाद उन्होंने कहा कि उनकी भारतीय दूतावास के कर्मचारी से बातचीत हुई, इसलिए उन्होंने पूर्व में ऐसा कहा. सवाल यह है कि एक मंत्री दूतावास के एक कर्मचारी से क्यों डील करता है."

नेपाल में डर

कुछ हलकों में यह भी डर था कि मोदी का भाषण नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे गुटों को मज़बूती देगा.

इमेज कॉपीरइट Reuters

युबराज घीमिरे कहते हैं, "चर्च लॉबी के उकसावे में भी यात्रा का विरोध हुआ. नेपाल 2006 से धर्मनिरपेक्ष देश घोषित है. मोदी के विरोधियों की सोच थी कि उनके आने से प्रतिगामी शक्तियों को बल मिलेगा."

घिमिरे के अनुसार नेपाल के साथ यह ताज़ा स्थिति भारत की नेपाल के साथ कूटनीति की शैली पर भी सवाल उठाता है जिसे लेकर पूर्व में नेपाल की ओर से आपत्ति जताई जाती रही है.

वह कहते हैं कि लोगों को लगता है कि नेपाल सरकार अलग-अलग आवाज़ में बात करती है औऱ डिप्लोमेसी निजी संबंधों पर आधारित है न कि दो सरकारों के बीच संबंधों के आधार पर.

बीबीसी से बातचीत में यात्रा रद्द करने पर स्थानीय लोगों ने निराशा जताई.

ज़िम्मेदार कौन

Image caption स्थानीय नागरिक राजकुमार लामा.

रामकुमार लामा मोदी के जनकपुर न जाने से निराश हैं. वो कहते हैं, "मोदी को जनकपुर में मंदिर दर्शन के लिए जाना था, लेकिन वो नहीं हो पाया. ऊपर वालों को पता होगा क्या हुआ. उनके वहां जाने से नेपाल को फ़ायदा होता."

नारायण श्रेष्ठ ने बताया कि जनकपुर, लुंबिनी और मुक्तिनाथ में जो लोग मोदी का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें मोदी के न आने से दुख होगा. कपिल जीसी मानते हैं कि उनके नहीं आने का "राजनीतिक कारण" होगा.

युबराज घिमिरे मानते हैं कि मोदी के जनकपुर न जाने के लिए स्थानीय लोग नेपाली लीडरशिप के अलावा भारतीय दूतावास को ज़िम्मेदार मानेंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार