मिस्रः तहरीर चौक पर फिर प्रदर्शन शुरू

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मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को 2011 आंदोलन के दौरान हुई क़रीब 200 मौतों के मामले में अदालत के बरी किए जाने से लोग नाराज़ हैं.

अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर प्रर्दशनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.

इस झड़प में अब तक कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है.

फ़ैसले के कुछ घंटे बाद लोग तहरीर चौक पर जमा होने लगे. मुबारक विरोधी उदारवादी प्रदर्शनकारियों के साथ प्रतिबंधित मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक भी प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं.

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तहरीर चौक पर लगभग दो हजार लोग जमा हैं.

मुबारक को शुरू में आजीवन क़ैद की सज़ा हुई थी. बाद में सुनवाई के दौरान उन्हें बरी कर दिया गया.

क्रांति की जन्मस्थली

तहरीर चौक से 2011 की मिस्र क्रांति शुरू हुई और फ़रवरी में मुबारक को दशकों पुरानी सत्ता गँवानी पड़ी.

अदालत के फ़ैसले से मुबारक के विरोधी मायूस हैं. मायूस लोगों में महमूद बशर भी शामिल हैं.

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महमूद बशर ने कहा, "अब हमें सब कुछ शून्य से शुरू करना पड़ेगा. इस फ़ैसले का सबसे ख़तरनाक पहलू यह है कि इसने मिस्र में न्यायपालिका पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है.”

निर्दोष मुबारक

मुबारक के समर्थक फ़ैसले से बहुत खुश हैं. वो अदालत के बाहर सड़कों पर जश्न मनाते दिखे.

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इनमें एक अर्थशास्त्री समै अबु अरयांस कहते हैं कि उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई.

अरयांस ने कहा, “हमें ऐसी उम्मीद थी. मेरा मानना है कि राष्ट्रपति मुबारक निर्दोष हैं और उन पर लगे आरोप ग़लत हैं कि उन्होंने लोगों पर गोली चलाने का आदेश दिया, जैसा कि दावा किया जाता है."

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Image caption हत्या के मामले में मुबारक भले ही बरी हो गए हों लेकिन गबन का मामला अभी चलता रहेगा.

वे बताते हैं, ''मेरा मानना है कि जनवरी क्रांति के दौरान जो लोग मारे गए वो इस्लामी चरमपंथियों और ख़ासकर मुस्लिम ब्रदरहुड के हमलों में मारे गए. उन्होंने हमले किए ताकि लोगों को मुबारक की सत्ता के ख़िलाफ़ भड़काया जाए.”

अभी हिरासत में

फ़ैसले के बाद मुबारक ने एक टीवी चैनल से कहा कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया.

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हालांकि ग़बन के मामले में वह अभी एक सैन्य अस्पताल में हिरासत में हैं और कुछ महीने उन्हें क़ैद रहना पड़ेगा.

मुबारक, उनके पूर्व गृह मंत्री हबीब अल-आदली और छह अन्य को हत्या की साज़िश में दोषी क़रार दिया गया था और जून 2012 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. मगर पिछले साल दोबारा सुनवाई शुरू हुई.

माना जाता है कि 11 फ़रवरी 2011 को मुबारक के इस्तीफ़ा देने से पहले सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में क़रीब 800 लोग मारे गए थे.

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