स्विट्ज़रलैंड ने नकारा 'इकोपॉप' प्रस्ताव

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स्विट्ज़रलैंड में मतदाताओं ने अप्रवासियों की संख्या कुल आबादी की 0.2 फ़ीसदी रखने के प्रस्ताव को नकार दिया है.

स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रीय टीवी के अनुसार रविवार के जनमत संग्रह के आंशिक परिणामों के मुताबिक़ 74% मतदाताओं ने इस प्रस्ताव को ख़ारिज किया है.

प्रस्ताव के समर्थकों का कहना था कि इससे देश के संसाधनों पर दबाव कम होगा.

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विरोधियों का तर्क था कि इससे अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि स्विट्ज़रलैंड की 80 लाख की आबादी में से करीब एक चौथाई विदेशी हैं.

'इकोपॉप'

इस प्रस्ताव का अर्थ यह था कि सरकार को अप्रवासियों की संख्या को 80,000 से घटाकर 16,000 प्रतिवर्ष करनी पड़ती.

स्विट्ज़रलैंड की प्रत्यक्ष लोकतंत्र प्रणाली के तहत नागरिक अगर किसी विषय पर पर्याप्त हस्ताक्षर जुटा लें तो वह जनमत संग्रह के लिए मजबूर कर सकते हैं.

यूरोपीय संघ के मुक्त आवागमन समझौते से बाहर रहने के बाद फ़रवरी में स्विट्ज़रलैंड में अप्रवासी कोटा को फिर जारी किया गया था.

सरकार को इस जनमत संग्रह के परिणामों को अभी लागू करना है जिसकी वजह से यूरोपीय संघ से संबंध खटाई में पड़ गए थे.

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रविवार को दो जनमत संग्रह और किए गए. एक तो केंद्रीय बैंक को अपने सोने के भंडार को बढ़ाने पर मजबूर करने वाला था और दूसरा निर्वासितों के लिए कर लाभ को बंद करने को लेकर था.

जानकारी के अनुसार यह दोनों प्रस्ताव भी पर्याप्त समर्थन जुटाने में नाकाम रहे.

इस प्रस्ताव को स्विट्ज़रलैंड के 40 साल पुराने इकोपॉप आंदोलन के नाम पर इकोपॉप नाम दिया गया था. उस आंदोलन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए आबादी नियंत्रण करना था.

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जिनेवा में बीबीसी संवाददाता इमोजेन फॉक्स का कहना है कि हालांकि स्विट्ज़रलैंड में बेरोज़गारी कम है और जीवन-स्तर ऊंचा है लेकिन कई स्विस नागरिक बढ़ती भीड़ और पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान को लेकर चिंतित हैं.

स्विट्ज़रलैंड की जनसंख्या बीस साल में दस लाख बढ़ गई है. यहां की आबादी अब लगभग 82 लाख है. इसके करीब 23 फ़ीसदी निवासी विदेशी नागरिक हैं, जिनमें से ज़्यादातर यूरोपीय राज्यों से है.

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