करियर गर्दिश में, तो आज़माएँ ये नुस्ख़े

  • 1 दिसंबर 2014
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जब आपका करियर आगे नहीं बढ़ पा रहा हो, आप किसी न किसी को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराने लगते हैं.

सबसे आसान यह होता है कि हम अपने जीवन में आई रुकावट के लिए ज़िम्मेदार लोगों की तलाश शुरू कर देते हैं और उन्हीं पर सारा दोष मढ़ देते हैं.

इस तरह हम खुद को सांत्वना दे लेते हैं कि हममें कोई गड़बड़ी नहीं है, और जो हुआ है उसके लिए कोई और ही दोषी है.

ऐसा कम ही होता है कि करियर में आई रुकावट के लिए हम खुद को ज़िम्मेदार ठहराते हों. इसके उलट, हम खुद को छोड़कर बाकी सभी को इसके लिए ज़िम्मेदार मानते हैं– कंपनी को, जॉब मार्केट को और यहाँ तक कि अपने दोस्तों को भी. मगर कभी आईने में झाँकने का साहस नहीं करते.

प्रोफ़ेशनल लोगों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी साइट, लिंक्डइन की शुरूआत में अहम भूमिका निभाने वाले कुछ लोगों ने इस पर अपने विचार व्यक्त किए. इनमें से दो लोगों के विचार हम साझा कर रहे हैं.

ज़रा संभलकर

जैक वेल्च, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, जैक वेल्च मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट

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आपकी 10 हरकतें जो आपके करियर का खात्मा कर सकती हैं" नाम की एक पोस्ट में वेल्च ने लिखा था: "करियर की राह कभी भी निर्विघ्न नहीं होती, यह सीधी नहीं चलती."

अगर करियर में तरक्की करते रहना चाहते हैं तो ऐसा न करें:

  • क्षमता से ज्यादा का वादा करना और उसको पूरा नहीं कर पाना
  • बदलाव का विरोध करना – नए विचारों को अपनाने में विफल रहना
  • अपने बॉस का दिल जीतने की कोशिश करना लेकिन सहकर्मियों का नहीं
  • निश्चिंतता – आगे बढ़ना छोड़ देना, समस्याओं को गिनाना, समाधान नहीं

अगर आप अपने व्यवहार को समझते हैं तो उसे बदलने का बीड़ा उठाइए. अगर आप ऐसा कर पाते हैं तो आपका करियर आसमान छूने लगेगा.

महिलाओं के लिए सुझाव

लिंडा डेस्कानो, ग्लोबल हेड, कंटेंट एंड सोशल

डेस्कानो ने "बड़बोला हुए बिना दफ़्तर में खुद को प्रोमोट करने के 5 तरीके" नाम की पोस्ट में लिखा है.

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वे कहती हैं, "सिटी और लिंक्डइन के नए शोध के अनुसार पुरुष ऑफ़िस में खुद को प्रोमोट करने को अच्छा नहीं मानते. इसीलिए महिलाओं ने इस बात की आशंका ज़ाहिर की कि ‘सेल्फ प्रोमोशन’ का उनका प्रयास उल्टे उन पर भारी पड़ेगा”.

तो फिर सवाल उठता है कि आगे बढ़ने की चाह रखने वाले लोग अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाए बिना खुद को कैसे प्रोमोट करें?

ये रहे ख़ास नुस्ख़े:

"संवाद, संवाद, संवाद. इसे स्पष्ट रूप से कीजिए, यह बताइए कि इससे क्या अंतर पड़ेगा और व्यवसाय के लिए यह क्यों जरूरी है. इसे लगातार करते रहिए. इसे पूरे विश्वास के साथ कीजिए. दूसरे शब्दों में, आवाज़ उठाने के लिए माफ़ी मत माँगिए, खुलकर बोलिए और सच बोलिए."

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"किसी महिला के लिए बहुत जोखिम उठाए बिना अपनी विश्वसनीयता और अपनी उपस्थिति दर्ज करने का प्रभावी तरीका है कि वे ‘वैल्यू प्रोपोजिशन’ पर अपना ध्यान केंद्रित करें. एक बार जब आपके सीनियर आपको समझ लेते हैं कि आप दूसरों की मदद व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में कर सकते हैं तो इससे बहुत अंतर पडता है."

पिछली सफलताओं की शेख़ी बघारने की जगह, अगर आप खुद को ‘प्राब्लम सॉल्वर’ यानी मुश्किलों को सुलझाने वाले के रूप में पेश करें तो यह आपको एक ऐसे लीडर के रूप में स्थापित करेगा जो संगठन की भलाई के लिए काम करने का इच्छुक है न कि अपने स्वार्थ के लिए.

‘मैं’ और ‘हम’ का असमंजस

जॉयस एड्वाइजर्स की नैन्सी जॉयस का कहना है, "अनेक महिलाएं खुद को प्रोमोट करने के क्रम में ‘मैं’ शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहतीं. शोध से पता चला है कि अगर आप सिर्फ ‘हम’ शब्द का प्रयोग करते हैं तो आपको निजी श्रेय नहीं मिलेगा. इसके विपरीत, अगर आप ‘मैं’ का प्रयोग करते हैं तो आपकी प्रतिष्ठा एक ऐसे व्यक्ति के रूप में स्थापित होती है जो कि ‘टीम प्लेयर’ नहीं है."

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अब सवाल उठता है कि इससे कैसे निबटें?

जॉयस एक मिसाल देती हैं. वो कहती हैं कि आप कुछ इस तरह से कह सकते हैं, "अपने ब्रांड की पोजीशनिंग की रणनीति बनाने के दौरान मैं जिस तरह अपनी टीम को साथ लेकर चली हूँ उसके फायदे हुए हैं. हमने कुछ नए तरीके ढूँढे हैं और टीम ने इन प्रयासों को पूरी तरह से अपनाया है."

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.

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