इबोला डॉक्टर बने 'पर्सन ऑफ़ द ईयर'

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अमरीकी पत्रिका टाइम ने इबोला वायरस से लड़ रहे स्वास्थ्यकर्मियों को संयुक्त रूप से वर्ष 2014 का 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' चुना है.

पत्रिका ने इन स्वास्थ्यकर्मियों को 'इबोला फ़ाइटर्स' कहा है. इनके असीम साहस और अपने जीवन को जोख़िम में डालकर लोगों को बचाने के लिए उन्हें 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' चुना गया.

इस वार्षिक सम्मान के लिए पत्रिका के संपादकों के पास दुनियाभर के उद्योगपतियों, राजनेताओं, नए रिकॉर्ड क़ायम करने वाले कलाकारों के 50 नाम थे.

इबोला की चेतावनी

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इसी हफ़्ते इनमें से आठ लोगों के नाम चुने गए थे और बुधवार को 'इबोला फ़ाइटर्स' को 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' घोषित किया गया.

पत्रिका के अनुसार, दशकों से अफ़्रीका के ग्रामीण इलाक़ों में इबोला किसी मिथकीय दैत्य की तरह डराता रहा है और कुछ-कुछ सालों बाद यह इंसानी ज़िंदगियों को ख़त्म कर अपने गुफ़ा में लौट जाता रहा है.

पत्रिका के मुताबिक, इबोला एक युद्ध और एक चेतावनी है और हमारी वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी मजबूत नहीं है कि इस संक्रमण का मुक़ाबला कर सके.

पत्रिका कहती है कि 'हम' से मतलब सिर्फ ऐसे लोगों से नहीं है जो सुदूर इलाक़े में अपनी ज़िंदगी गंवा रहे हैं, बल्कि हरेक व्यक्ति है.

नरेंद्र मोदी

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Image caption टाइम के ऑन लाइन पोल में मोदी को सर्वाधिक 16 प्रतिशत वोट मिले थे.

टाइम ने अलग से एक ऑनलाइन चुनाव कराया था जिसमें उसके पाठकों को यह मौका दिया गया था कि वे अपनी पसंद से 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' चुन सकें.

ऑन लाइन चुनाव में पाठकों से सबसे अधिक पसंदीदा रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. उन्हें 50 लाख वोटों में से 16 प्रतिशत वोट मिले थे.

लेकिन मोदी अंतिम आठ में जगह बनाने में असफल रहे. अंतिम आठ में चीन के अलीबाबा कंपनी के सीईओ जैक मा, एपल के सीईओ टिम कुक, पॉप स्टार टेलर स्विफ़्ट, फ़र्गसन प्रदर्शनकारी, रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, नेशनल फ़ुटबाल लीग के आयुक्त रोज़र गुडेल और इराक़ी कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति मसूद बरज़ानी के नाम शामिल किए गए थे.

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