ऐसे भारत को 'घेर रहा है' चीन

  • 12 दिसंबर 2014
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चीन बेहद सक्रिय कूटनीति के साथ दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है.

एशिया की यह महाशक्ति अफ़गान शांति प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, बांग्लादेश को जंगी जहाज़ बेच रहा है, पाकिस्तान में बिजली परियोजनाएं स्थापित कर रहा है और भारत में निवेश कर रहा है.

इस इलाक़े में चीन के हालिया समझौतों पर एक नज़र.

अफ़ग़ानिस्तान

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इस क्षेत्र में चीन के आक्रामक रवैये का सबसे बड़ा उदाहरण उसका हिंसा-ग्रस्त अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया में मध्यस्थता करने का प्रस्ताव है.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेनाओं के घटते प्रभाव के बीच चीन ने तालिबान चरमपंथियों और देश की नई सरकार के बीच वार्ता में मध्यस्थता करने का प्रस्ताव रखा है.

यह ठीक वही बात है जो अक्टूबर में शपथ ग्रहण के बाद चीन यात्रा के दौरान अफ़गान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कही थी.

अफ़ग़ानिस्तान चाहता है कि चीन अपने सहयोगी पाकिस्तान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे, जो शांति प्रक्रिया की सफलता के लिए ज़रूरी है.

पाकिस्तान

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पाकिस्तान चीन का पुराना सहयोगी है और यह उसे लगातार सैन्य और आर्थिक सहयोग देता रहता है.

ताज़ा उदाहरण यह है कि चीन कथित रूप से पाकिस्तान को परमाणु क्षमता से लैस शाहीन-2 मिसाइल के और विकास में मदद कर रहा है.

पाकिस्तानी अख़बार द न्यूज़ के अनुसार पाकिस्तान को उम्मीद है कि वह चीन से 30-40 एफ़सी-31 स्टेल्थ एयरक्राफ़्ट ख़रीद लेगा ताकि "क्षेत्र में भारतीय प्रभुत्व को बढ़ने" से पहले ही रोक लिया जाए.

आर्थिक मोर्चे पर चीन पाकिस्तान को उसके भयंकर ऊर्जा संकट से निपटने में मदद कर रहा है.

पिछले महीने चीन ने पाकिस्तान के साथ 13 ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें सौर, पवन और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं.

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इसके अलावा दोनों देश पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे पर भी काम कर रहे हैं और तार्किक रूप से पाकिस्तान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह ग्वादर को पश्चिमी चीन से जोड़ने पर सहमत हो गए हैं.

बांग्लादेश

बांग्लादेश को भी चीन से हथियार और पैसा हासिल हो रहा है.

बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार बांग्लादेश को हाल ही में चार प्रशिक्षण विमान मिले हैं और उसने दो पनडुब्बियों का ऑर्डर दे दिया है.

इसके साथ ही उसे चीन से चार युद्धपोत ख़रीदे जाने की भी उम्मीद है.

चीन कथित रूप से बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश के लिए एक तेल पाइपलाइन के लिए पूंजी लगाने और स्थापित करने को भी तैयार है.

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इस दौरान दक्षिण-पश्चिम बांग्लादेश में समुद्र-तट पर एक बंदरगाह से पता चलता है कि भारत और चीन बांग्लादेश को प्रभावित करने के लिए किस तरह होड़ कर रहे हैं.

ढाका स्थित अख़बार न्यू एज के अनुसार बांग्लादेश चीनी कंपनी के साथ अनुबंध किए जाने को लेकर सतर्क है क्योंकि इससे भारत नाराज़ हो सकता है.

अख़बार के अनुसार चीन की सहभागिता पर एक बांग्लादेशी अधिकारी का कहना था इससे "दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक पर चीन का असर और गहरा होगा."

श्रीलंका

दक्षिण-पूर्वी श्रीलंका में हंबन्टोटा बंदरगाह चीन के दक्षिण एशिया में बंदरगाह निर्माण में सक्रियता का प्रमुख उदाहरण है.

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पूरे इलाके में चीन के बंदरगाह निर्माण के क़दम से कुछ भारतीय विश्लेषक चिंतित हैं और वह इसे 'मोतियों की डोरी' बताते हैं, जिसका अर्थ भारत को घेरने से है.

पाकिस्तान में ग्वादर और श्रीलंका में हंबन्टोटा चीनी योजना के मुख्य क़दम माने जा रहे हैं.

लेकिन चीन इस बात से इनकार करता है कि उसका बंदरगाह निर्माण भारत के ख़िलाफ़ है. उनका कहना है कि वह महज़ एक 'सामुद्रिक सिल्क रूट' बना रहे हैं- बंदरगाह वाले शहरों का जाल जिसका आर्थिक महत्व हो, सैनिक नहीं.

भारत

चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक सहयोगियों में से एक है लेकिन दोनों देशों में क्षेत्र पर प्रभाव को लेकर होड़ और सीमा पर विवाद है.

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दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध शिखर पर तब पहुंचे जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में भारत आए और दोनों देशों ने 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

एक समझौते के अनुसार चीन अगले पांच साल में भारत में आधारभूत ढांचे के विकास में 20 अरब डॉलर (12.47 ख़रब रुपए से ज़्यादा) निवेश करेगा.

लेकिन उसी समय लद्दाख में कथित रूप से चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की. इससे पता चलता है कि दशकों पुराने सीमा विवाद 21वीं सदी में भी दोनों एशियाई महाशक्तियों के आर्थिक संबंधों पर असर डाल रहे हैं.

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