छोटी लाइन रेल का प्यार

ऐंगस और कैथरीन इमेज कॉपीरइट

लंदन में भारत की नैरो गेज रेल यानी छोटी लाइन की तस्वीरों से जुड़ी प्रदर्शनी लगी. ये तस्वीरें ऑस्ट्रेलियाई फ़ोटोग्राफ़र ऐंगस मैकडॉनल्ड ने खींची थीं जिनका 2013 में निधन हो गया.

ऐंगस के निधन के बाद उनकी प्रेमिका कैथरीन एंडरसन ने उनके नाम पर एक ट्रस्ट बनाया ताकि ऐंगस का नाम और काम आगे बढ़ सकें.

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ऐंगस ने तीन साल तक भारत में घूमकर छोटी लाइन रेल की तस्वीरें खींची थीं. वह एक फ़ोटोग्राफ़र होने के अलावा यात्रा संस्मरण लेखक भी थे.

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यह तस्वीर माथेरन लाइट रेलवे की है. इस यात्रा के बारे में ऐंगस लिखते हैं कि ट्रेन कभी सीधी चढ़ाई चढ़ती है और कभी तेज़ी से नीचे उतरती है जिसका अनुभव हाड़ कंपकंपाने वाला होता है.

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रेल यात्रा में जीवन का सौंदर्य और मानवीय चेहरों की अलग-अलग छवियां देखना ऐंगस का शौक़ था. तस्वीर में एक परिवार को कांबलीघाट से गोरनघाट के बीच अरावली रेल यात्रा का लुत्फ़ उठाते देखा जा सकता है.

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ऐंगस ने 50 साल के जीवन में से 15 साल भारत में बिताए. उनके पिता एक डिप्लोमैट थे और उनका भारत आना-जाना लगा रहता था. अपने भारत प्रवास का अधिकांश हिस्सा उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज में बिताया था. यह तस्वीर अरावली रेल नेटवर्क पर पाडला स्टेशन की है.

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यह तस्वीर असम की बराक घाटी में चलनेवाली बराक एक्सप्रेस के इंजन की है. इसका नाम राइनोसेरॉस यानी गैंडा है.

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बराक घाटी की मीटर रेल सेवा 215 किलोमीटर लंबी है और लामडिंग से सिल्चर तक जाती है. तस्वीर में ट्रेन की खिड़की से बाहर दिखने वाले नज़ारे को क़ैद करते कैमरे के कमाल देखा जा सकता है.

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यह तस्वीर गुजरात में वडोदरा ज़िले के दाभोई रेलवे की है, जिसकी शुरुआत 1862 में हुई. एक समय दाभोई एशिया का सबसे बड़ा नैरो गेज रेलवे स्टेशन था. अब इसकी कई लाइनों को ब्रॉड गेज में तब्दील कर दिया गया है.

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दाभोई नेटवर्क पर ही रेल की सवारी का आनंद उठाते बच्चे. ऐंगस ने अपने प्रोजेक्ट के दौरान सैकड़ों तस्वीरें खींची थीं, जिन्हें अलग-अलग शीर्षक से किताब के रूप में छापा गया है. किताब का नाम है "इंडियाज़ डिसेपियरिंग रेलवेज़."

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यह तस्वीर दो फ़ीट चौड़ी दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे पर सोनाडा बाज़ार की है. पटरी के किनारे बने पुराने से घर में काम करती महिलाएं नज़र आ रही हैं. यह तस्वीर ऐंगस ने 4 अप्रैल 2007 को खींची थी.

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यह रेल सेवा पश्चिम बंगाल में न्यूजलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक जाती है. इसकी शुरुआत 1881 में हुई और यह आज भी सैलानियों के बीच बेहद मशहूर है.

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यह तस्वीर ग्वालियर लाइट रेलवे की है. 1909 में शुरू हुई यह रेल दो फ़ीट चौड़ी पटरी पर दौड़ती है और मध्य प्रदेश में 200 किलोमीटर दूरी तय करती है.

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यह तस्वीर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की है. इसे 1999 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया. यह दर्जा पाने वाली यह भारत की पहली रेल सेवा है. तस्वीर में दिख रहे बुज़ुर्ग ट्रेन का इंतज़ार करते एक-दूसरे के साथ बातचीत कर रहे हैं और बेंच के नीचे कुत्ता बड़े आराम से सो रहा है.

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ऐंगस मैकडॉनल्ड ने फ़ोटोग्राफ़ी को समर्पित अपने जीवन में ख़ासतौर से चीन, भारत और बर्मा में काम किया. साल 2013 में बर्मा में ही उनका निधन हो गया.

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