उड़ने वाली कारों के लिए हो जाएं तैयार

  • 15 दिसंबर 2014
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ये अब काल्पनिक बात नहीं रह गई कि आपके घर के बाहर ऐसा वाहन पार्क्ड हो जो कार भी हो, विमान भी और ड्रोन भी.

तो क्या ऐसा भी हो पाएगा कि खचाखच भरी सड़कों से वाहन चालक जब चाहे, उड़ान भरे और फिर जब सड़क, खेत या खुली जगह पर उतरना चाहे, तो ऐसा कर पाए?

कम से कम इसे साकार करने में तकनीकी तो आड़े नहीं आने वाली है. मुश्किल मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक बाधा दूर करने की है, क्योंकि शायद हमे इस बदलाव को स्वीकारने में अभी समय लगे.

मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में एसोसिएट प्रोफ़ेसर मेसी कमिंग्स ने तो भविष्य का यही सपना देखा है.

इस वाहन को ड्रोन और रोबोट कार से मिलाकर बनाया जाएगा लेकिन क्रांतिकारी बदलाव ये होगा कि आप न तो कार चला रहे होंगे न ड्रोन.

विमान भी तो ड्रोन है

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कमिंग्स का कहना है कि ड्रोन को लेकर मीडिया का पूर्वाग्रह नकारात्मक है, क्योंकि इन्हें जासूसी वाले कैमरों के रूप में देखा जाता है.

लेकिन ज़्यादातर लोगों को पता नहीं है कि जब वे विमान में होते हैं तो असलियत में वे ड्रोन पर सफर कर रहे होते हैं.

सभी एयरबसों और बोइंग विमानों की फ्लाई-बाई-वायर वही तकनीकी है जो ड्रोन्स में काम करती है.

मनुष्य और कंप्यूटर

तो भविष्य में ड्रोन क्यों चाहिए? जवाब यह है कि हम लोग बहुत ख़राब ड्राइवर हैं.

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मनुष्य सहज तौर पर किसी भी त्वरित काम को करने में आधा सेकेंड देरी से करता है. मसलन, यदि गली में लुढ़कती आ रही गेंद को देखकर या फिर आकाश में किसी विमान को देखकर उससे बचाव करना हो तो, मनुष्य को कदम उठाने में इतना समय लग ही जाता है.

आधा सेकेंड की देरी भी ज़िंदगी और मौत का अंतर बन सकती है. कंप्यूटर और ऑटोमैटिक सिस्टम ऐसा नहीं करते- वे माइक्रोसेकंड में कदम उठाते हैं.

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इसलिए, ज़मीन और हवा में भविष्य की परिवहन व्यवस्था जब हम कंप्यूटर के हवाले करेंगे तो यह वास्तव में ज़्यादा सुरक्षित होगी.

कमिंग्स का कहना है कि इस विचार को अमली जामा पहनाने में कोई तकनीकी बाधा नहीं है.

हमें उत्पादन में सुधार और इन्हें बनाने की लागत में कमी लानी है यानी और रोबोट्स की ज़रूरत पड़ेगी. इसलिए ऐसे रोबोट बनाने होंगे जो सस्ते में और रोबोट्स बना सकें.

हैकर्स से ख़तरा

तो क्या हमें मशीनों से डरने की ज़रूरत है? क्या सारा नियंत्रण मशीनों के हाथों में चला जाएगा.

कमिंग्स इससे चिंतित नहीं हैं. उनकी चिंता हैकर्स और चरमपंथी हैं.

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वह ऐसी तकनीकी विकसित करने पर काम कर रही हैं जिससे किसी भी उड़ने वाला रोबोट हमले बच सके और ख़ुद ही बिना जीपीएस या बाहरी सिग्नल के, अपनी रास्ता खोज सके.

इस पूरी योजना की सुरक्षित यातायात के नज़रिए से अपार संभावनाएँ हैं.

ये संभावनाएँ दुनिया के उन हिस्सों में ज़्यादा है जहाँ सड़क और हवाई नेटवर्क ज़्यादा विकसित नहीं हैं.

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