सिडनी: संकट ख़त्म, हमलावर समेत तीन की मौत

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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में एक कैफ़े में बंधक बनाए गए लोगों को कमांडो ऑपरेश के बाद छुड़ा लिया गया है.

लेकिन इस ऑपरेशन में हमलावर समेत तीन लोग मारे गए हैं.

स्थानीय मीडिया के अनुसार मारे जाने वालों में लिंट कैफ़े के मैनेजर 34 वर्षीय टोरी जॉनसन और 38 साल की एक महिला पेशे से वकील कटरीना डावसन हैं.

इस हमले में एक पुलिसकर्मी समेत चार लोग घायल भी हुए हैं.

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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबट ने कहा कि इस घटना से कई सबक़ सीखने की ज़रूरत है.

हमलावर को मांसिक रूप से अस्वस्थ क़रार देते हुए टोनी एबट ने कहा, ''उसने अपनी इस हरकत को आईएस की विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की. ये बहुत दुख की बात है कि हमसे से कई लोग ऐसे हैं जो राजनीति से प्रेरित हिंसा में यक़ीन रखते हैं. लेकिन मार्टिन प्लेस की ये घटना हमें आश्वस्त करती है कि हमलोग इस तरह के लोगों से क़ानूनी रूप से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.''

ऑस्ट्रेलिया में शर्णार्थी के तौर पर रह रहे ईरानी मूल के हारून मोनिस ने सोमवार की सुबह लगभग 40 लोगों को एक कैफ़े के अंदर बंधक बना लिया था.

क़रीब 16 घंटे के बाद सिडनी पुलिस ने एक कमांडो ऑपरेशन किया.

न्यूसाउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त एंड्रयू सिपियोन ने ऑपरेशन ख़त्म होने के बाद एक प्रेस वार्ता में कहा कि अन्य सभी बंधकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

सिपियोन ने इसे एक अकेली घटना क़रार देते हुए कहा, ''ये एक एकाकी घटना है. इस तरह की एक घटना के कारण हमें अपने आप पर या इस शहर पर विश्वास नहीं खोना चाहिए.''

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Image caption एक बंधक पुलिस की मदद से बाहर आते हुए

इस संकट में दो भारतीय नागरिक भी कैफ़े में फंसे थे.

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर बताया कि बंधकों में शामिल भारतीय नागरिक पुष्पेंदु घोष और विश्वकांत अंकित रेड्डी सुरक्षित बाहर आ गए हैं.

पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कैंफ़े के अंदर क्या हुआ इसके बारे में कुछ भी अनुमान के आधार पर न कहें. पुलिस आयुक्त ने कहा कि अगर कमांडो उस समय कैफ़े के अंदर ने घुसते तो कुछ और लोगों की जानें जा सकती थीं.

सिडनी के कैफ़े में लोगों को बंधक बनाने वाले ईरानी मूल के हारून मोनिस राजनीतिक शरण पर 1996 में ऑस्ट्रेलिया आए थे.

मोनिस के पूर्व वकील के मुताबिक़ वह किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं और तन्हा रहना पसंद करते थे.

49 साल के मोनिस पर कई हिंसक अपराधों के लिए ऑस्ट्रेलिया में मुक़दमा चल रहा है. उन पर अपनी पूर्व पत्नी की हत्या का भी आरोप है.

फ़िलहाल वो ज़मानत पर रिहा थे.

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मोनिस पर यह भी आरोप है कि उन्होंने विदेशों में सेवा के दौरान मारे गए ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के मां बाप को गालियों से भरे पत्र भेजे.

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