पेशावर हमला: उसने दिखाया जैसे वो मर चुकी है

  • 16 दिसंबर 2014
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पाकिस्तान के शहर पेशावर में एक स्कूल पर हुए हमले में 132 लोग मारे गए हैं. इनमें से ज़्यादातर बच्चे हैं. तालिबान ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री समेत कई नेताओं ने हमले की निंदा की है.

प्रत्यक्षदर्शियों की आँखों देखी

प्रत्यक्षदर्शी

जैसे ही गोलीबारी शुरु हुई हम कक्षाओं की तरफ़ भागे. उस समय नौंवी और दसवीं के छात्रों के लिए पार्टी चल रही थी. इसलिए वहाँ काफ़ी छात्र थे. ऊपरी माले पर 11वीं और 12वीं के छात्रों की परीक्षा चल रही थी. मैने हमलावरों को देखा था. वो छह या सात थे. वो हर क्लास में जाकर बच्चों को मार रहे थे.

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प्रत्यक्षदर्शी

जब हमल हुआ तो हम कुर्सी और मेज़ के नीचे छिप गए. लेकिन उन्होंने हमारे सर पर गोलियाँ चलाईं और टाँगों पर भी. वे लगातार गोलियाँ चलाते रहे. लेकिन हम हिले नहीं क्योंकि जो भी हिल रहा था वो उस पर गोलियाँ चला रहे थे. हम टेबल के नीचे ही बैठे रहे.

रिश्तेदारों की ज़बानी

रिश्तेदार

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मेरी सहेली की बच्ची बच निकलने में सफल रही. हमला लड़कों के सेक्शन में हुआ था इसलिए वो बच्ची थोड़ी दूरी पर थी. वो किसी तरह अपने भाई को ढूँढने पहुँची पर वो उसे नहीं ढूँढ पाई. वो जिस कमरे में पहुँची वहाँ गोलीबारी चल रही थी. उसके कपड़े खून से लथपथ थे. उसने दिखाया जैसे वो मर चुकी है ताकि हमलावर चले जाएँ. फिर वो पिछले दरवाज़े से भाग निकली.

रिश्तेदार

मेरे बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते हैं जहाँ हमला हुआ. सुबह हमारे पास फ़ोन आया कि कुछ चरमपंथी स्कूल में घुस गए हैं. मेरा एक बेटा सुरक्षित निकल आया लेकिन एक अंदर ही है. मुझे नहीं पता कि वो सुरक्षित है या नहीं. मेरे रिश्तेदार अस्पतालों में उसे खोज रहे हैं. पता नहीं वो ज़िंदा है या नहीं.

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