पेशावर हमलों पर मलाला बोली हार नहीं मानेंगें

  • 16 दिसंबर 2014
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पाकिस्तान के एक स्कूल में हुए चरमपंथी हमले की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई विश्व नेताओं ने निंदा की है.

अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है, "सिडनी और पेशावर की घटना से साबित हुआ है कि स्थानीय आतंकवाद का ख़तरा दरअसल वैश्विक आतंकवाद का ख़तरा भी है. इसलिए अमरीका ज़्यादा देशों के साथ सहयोग कर रहा है."

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि पाकिस्तान से आने वाली ख़बर सदमे में डालने वाली है और ये बहुत डरावना है कि बच्चों को महज़ स्कूल जाने के लिए मारा जा रहा है जबकि अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने इस ग़ैर-इस्लामिक बताया है.

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वहीं नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "यह असवंदेनशील कार्रवाई है, जिसकी बर्बरता बयां नहीं की जा सकती.. जिसमें इंसानों में से भी सबसे मासूमों की जान ली गई है- स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे."

पाकिस्तान के शहर पेशावर में हुए तालिबान के हमले में अब तक 126 लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें ज़्यादातर बच्चे हैं.

नोबेल पुरस्कार जीतने वाली मलाला यूसुफ़ज़ई ने भी हमले की निंदा की है और कहा, "इस घटना से मेरा दिल टूट गय है. मैं इस कायरतापूर्ण कदम की मैं निंदा करती हूँ और पाकिस्तान की सरकार और सेना के साथ हूँ. मैं और दुनिया के लाखों लोग इन बच्चों के लिए शोक मना रहा हैं लेकिन हम हार नहीं मानेंगे."

अमानवीय हमला

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भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हमले की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया, "मैं पेशावर में स्कूली हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ. ये अमानवीय हमला आतंकवाद का असल चेहरा उजागर करता है."

उधर पाकिस्तान में तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान ने कहा है कि वे स्कूल पर हुए हमले से स्तब्ध हैं. इमरान ख़ान ने कहा कि इस अमानवीय हमले की वे निंदा करते हैं.

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि बच्चों को निशाना बनाना कायरता का काम है.

वहीं नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, "जो बच्चे मारे गए वो सब हमारे बच्चे हैं, पाकिस्तान सरकार को बच्चों को हिंसा से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए. ये मानवता के लिए काला दिन है."

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