पेशावर हमला ग़ैर-इस्लामी: अफ़ग़ान तालिबान

पेशावर के एक स्कूल से बच्चों को निकलते एक सुरक्षाकर्मी इमेज कॉपीरइट AP

पेशावर के आर्मी स्कूल पर पाकिस्तानी तालिबान के हमले की अफ़ग़ान तालिबान ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे ग़ैर-इस्लामी कहा है.

इस हमले में 132 बच्चों समेत 140 से अधिक लोग मारे गए हैं. इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़ासी निंदा हो रही है. पाकिस्तानी सेना के अनुसार इस घटना में शामिल सात हमलावर भी मारे गए हैं.

कई घंटों तक चले इस हमले और सेना की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में तीन दिन के शोक की घोषणा की गई है. भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए सभी स्कूलों में दो मिनट का मौन रखने का आदेश दिया है.

'बदले की कार्रवाई'

अफ़ग़ान तालिबान के प्रवक्ता ज़हीबुल्लाह मुजाहिद ने पेशावर हमले में मारे गए बच्चों के परिवारों से हमदर्दी जताई.

प्रवक्ता ने कहा, "निर्दोष बच्चों और महिलाओं की हत्या ग़ैर-इस्लामी और अमानवीय है. हर व्यक्ति को इसका ख़्याल रखना चाहिए."

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Image caption पेशावर के आर्मि स्कूल पर हुए हमले में 132 बच्चों की मौत हो गई.

उधर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने मंगलवार को पेशावर में किए गए हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए इसे सही ठहराने की कोशिश की थी.

हमले को जायज ठहराते हुए प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी ने कहा था कि यह हमला उत्तरी वज़ीरिस्तान और ख़ैबर प्रांत में पाकिस्तान सेना की ओर से जारी कार्रवाई के ख़िलाफ़ है.

उनका दावा था कि पिछले एक साल में उनके कबीले के क़रीब 600 लोग मारे गए हैं.

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आठ घंटे तक चली कार्रवाई

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक हमलावर स्कूल में पीछे से फेंस को काटकर दाखिल हुए. उन्होंने बंबों से लैस वेस्ट पहन रखे थे और बंदूकें उठ रखी थीं.

उन्होंने स्कूल के ऑडिटोरियम पर हमला किया जहाँ बच्चे एक इम्तिहान लिख रहे थे.

फिर वे हर कक्षा में दाख़िल हुए और अंधाधुँध गोलीबारी करने लगे. फिर सुरक्षाकर्मी स्कूल में पहुँचे और हमलावरों का सामना करने लगे. ये कार्रवाई आठ घंटे तक चलती रही.

हमले की ख़बर के बाद पेशावर पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की और दावा किया कि वे पाकिस्तान से आतंकवाद का ख़ात्मा कर देंगे.

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