सूनामी: बिछड़े पिता-बेटी के मिलने की कहानी

मुस्तफ़ा और रीना इमेज कॉपीरइट Other

दस साल पहले 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के तटीय इलाक़े के पास समुद्र में रिक्टर स्केल पर 9.15 तीव्रता का भूकंप आया था.

इसके बाद इंडोनेशिया, थाईलैंड, भारत और श्रीलंका समेत नौ एशियाई देशों में आई विनाशकारी सूनामी में लाखों लोगों की मौत हो गई थी.

इस सूनामी में इंडोनेशिया का बांडा आचे प्रांत बुरी तरह तबाह हो गया था.

लेकिन इस तबाही में भी चार साल की रीना और उनके पिता किसी तरह बच गए थे. उनके बिछड़ने और मिलने की कहानी.

रीना और उनके पिता की आपबीती

इमेज कॉपीरइट Other

पहली नज़र ने रीना 14 साल की किसी आम इंडोनेशियाई लड़की की ही तरह शर्मीली और मासूम नज़र आती हैं.

हम रीना से रविवार को मिले क्योंकि वो अपनी परीक्षा की तैयारियों में व्यस्त थीं. उनके पिता मुस्तफ़ा बताते हैं कि रीना अपने स्कूल की होनहार छात्राओं में से एक है और डॉक्टर बनना चाहती हैं.

सूनामी के दिन को याद करते हुए रीना कहती हैं, "रविवार का दिन था. सुबह मैं अपने परिवार के साथ बैठी थी, जब मुझे शक्तिशाली भूकंप का महसूस हुआ."

वो बताती हैं, "इसके कुछ मिनट बाद ही एक रिक्शावाला हमारे घर के पास आया. चिल्ला कर कहने लगा कि समुद्र का पानी ज़मीन की तरफ आ रहा है, जल्दी भागो."

रीना बताती हैं, "हम सबने भागना शुरू कर दिया. मैंने अपनी मां का हाथ पकड़ा. लेकिन वो लहरों में फंस गईं और मैं उनसे बिछड़ गई. जब मुझे होश आया तो मैं गंदे पानी और शवों के बीच अकेली पड़ी हुई थी."

रीना को छात्रों के एक दल ने बचाकर ब्रितानी सहायता एजेंसी सेव दी चाइल्ड को सौंप दिया. इस त्रासदी के बाद रीना ने अपनी माँ और बड़ी बहन को फिर कभी नहीं देखा.

स्मृतियां

इमेज कॉपीरइट Other

सूनामी के दो दिन बाद रीना के पिता मुस्तफ़ा वापस लौटे, जो कि व्यापारिक यात्रा पर गए हुए थे. वापस लौटकर जो उन्होंने देखा, उसकी स्मृतियां उनके दिलो-दिमाग में आज भी ताज़ा हैं.

अपना पुराना घर दिखाते हुए वो कहते हैं, "यहां कुछ भी नहीं बचा था. दीवार में एक बड़ा सा सुराख बन गया था, जिससे होकर पानी निकला था."

मुस्तफ़ा बताते हैं, "जब मैं घर आया तो मुझे लगा कि वहां कुछ बचा नहीं होगा. मुझे छोड़कर कोई ज़िदा नहीं बचा होगा. मैं लाशों से गुज़रते हुए आगे बढ़ा और अपने भाई से मिला. उन्होंने बताया कि हमारा पूरा परिवार मर चुका है."

लेकिन इस समय तक मुस्तफ़ा यह नहीं जानते थे कि उनकी छोटी बेटी ज़िंदा है.

पिता की सीख

रीना बताती हैं, "डैड मुझे शुरू से ही अपना नाम, माता-पिता का नाम और घर का पता जैसी चीज़े याद कराते थे. इसलिए सेव दी चिल्ड्रेन के लोग जब मुझसे पूछते थे तो मैं उन्हें लगातार बताती रहती थी, मेरा नाम रीना है. मेरे पिता का नाम मुस्तफ़ा है. यह तबतक चला जबतक उन्होंने मेरा पता नहीं ढूंढ लिया."

इमेज कॉपीरइट Other

सूनामी के बाद सेव दी चिल्ड्रेन ने रीना की तस्वीरें बांडा आचे की विभिन्न जगहों पर लगाई. इस हादसे के क़रीब एक महीने बाद बाप-बेटी एक दूसरे से मिले.

उस समय इदिल सुपात्रा सेव दी चिल्ड्रेन के साथ काम कर रहे थे. उन्होंने बताया, "मैंने रीना को मुस्तफ़ा के साथ चार पुरुषों की तस्वीरें दिखाईं और पूछा कि इनमें से उनके पिता कौन हैं, इस पर उसने बार-बार मुस्तफ़ा की ओर ही इशारा किया."

सुपात्रा कहते हैं, "जब वो दोनों हमारे ऑफ़िस में मिले तो वह काफी भावुक क्षण था. मुस्तफ़ा और रीना रोने लगे. अगर सच कहें तो हम सब रो रहे थे."

डर का साया

इमेज कॉपीरइट Other

रीना कहती हैं, "मैं डरी हुई थी. मैं बहुत लंबे समय तक डरी रही. मुझे हमेशा लगता था कि मैं अपने पिता को भी खो दूंगी, क्योंकि मैंने सबको खो दिया है. लेकिन आप डर से उबर जाते हैं और मैं भी इससे उबर चुकी थी."

रीना ने पिछले दस साल में अपनी माँ और बड़ी बहन के बिना जीना सीखा है. अभी भी उनके लिए इस पर बात करना कठिन है. लेकिन पिता और बेटी और एक दूसरे का ख्याल रखते हैं. दोनों ने अपना जीवन दुबारा शुरू किया है.

मुस्तफ़ा कहते हैं, "हमने इस घर को दुबारा बनाया है और अब हम इसे बेचना चाहते हैं. उन पैसों से हम फिर कहीं और जाकर बसना चाहते हैं."

उन्होंने दुबारा शादी कर ली. लेकिन अपनी पहली पत्नी के बारे में बात करते हुए भावुक हो जाते हैं.

मुस्तफ़ा ने कहा, "मैं हमेशा यह सोचता हूं कि शायद रीना की तरह मेरी पत्नी और बड़ी बेटी भी वापस आ जाएं. अगर चार साल की लड़की ज़िंदा बच सकती है तो वे क्यों नहीं?."

सुरक्षित रहने का तरीक़ा

इमेज कॉपीरइट AFP

इस बाप-बेटी ने फिर किसी त्रासदी की स्थिति में ख़ुद को सुरक्षित रखने का एक तरीक़ा विकसित कर लिया है.

मुस्तफ़ा बताते हैं, "कुछ साल पहले जब मैं अपने काम पर था तो एक शक्तिशाली भूकंप आया. मेरे बॉस ने कहा कि रीना को खोजने के लिए घर मत जाओ, यह काफ़ी ख़तरनाक़ है. लेकिन मैंने उनसे कहा कि मैं जानता हूं कि वह कहां हो सकती है."

Image caption आचे में बहुत से लोगों को अभी भी पुनर्वास का इंतज़ार है

वो कहते हैं, "मैंने उससे कह रखा है कि अगर फिर कोई बड़ा भूकंप आता है तो मोटरसाइकिल से ऊंचे स्थान की ओर भागो, एक सुरक्षित जगह को हम दोनों जानते हैं. जितना जल्दी हो सकता था, मैं उसे खोजने निकल पड़ा था और जैसा की मुझे उम्मीद थी, वो वहीं थी."

रीना मुस्कराते हुए कहती हैं, "हम जानते हैं कि अब कैसे हम एक-दूसरे को खो नहीं सकते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार