अफ़गानिस्तान: 13 साल लंबा अंतरराष्ट्रीय अभियान ख़त्म

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नैटो और अमरीका ने आखिरकार अफ़गानिस्तान में तेरह वर्षों से तालिबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अपने अभियान को आधिकारिक रूप से ख़त्म घोषित कर दिया है.

रविवार को एक समारोह में इंटरनेशनल सिक्यूरिटी असिस्टेंस फ़ोर्स (आईएसएएफ़) के कमांडर जनरल जॉन कैंपबेल ने सैन्य संगठन के झंडे को उतार कर अभियान का समापन किया.

अमरीका के ट्रेड सेंटर पर 11 सितम्बर 2001 में हुए चरमपंथी हमले के बाद अमरीका के नेतृत्व में नैटो ने तालिबान सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध घोषित कर दिया था.

आगामी एक जनवरी से अब अफ़गानिस्तान में एक नए अंतरराष्ट्रीय मिशन के तहत आईएसएएफ़ के केवल 12,500 सैनिक अफ़गान सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण और मदद के लिए रुके रहेंगे, जिनमें 11,000 अमरीकी सैनिक हैं.

समझौता

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Image caption आईएसएएफ़ के कमांडर जनरल जॉन कैंपबेल काबुल में नैटो फ़ौजों की वापसी की घोषणा की.

पिछले तेरह सालों में मारे गए अंतरराष्ट्रीय और अफ़गान सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कैंपबेल ने कहा, "हमारे सामने बहुत चुनौतीभरा रास्ता है, लेकिन अंत में विजय हमारी ही होगी."

पिछले सितम्बर में राष्ट्रपति बने अशरफ़ गनी ने एक दिन पहले ही नए मिशन को जारी रखने के संबंध में अमरीका और नैटो के साथ द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किया था.

करीब 50 देशों के सैनिकों ने जब अफ़गानिस्तान में युद्ध शुरू किया था तो आईएसएफ का गठन किया गया था.

हताहत

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अफ़गान युद्ध में करीब 3,500 अंतरराष्ट्रीय सैनिक मारे गए थे, जिसमें दो तिहाई अमरीकी सैनिक थे.

वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की संख्या बढ़कर सर्वाधिक 1,40,000 हो गई थी, जिसमें 101,000 अमरीकी सैनिक थे. लेकिन 2012 में अतिरिक्त 33,000 अमरीकी सैनिकों को वापस बुला लिया गया था. उसके बाद से ही अमरीका अपना अभियान समेटने में लगा है.

अफ़गानिस्तान से नैटो के जाने की देश में मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है. कुछ लोगों को लगता है कि देश में सुरक्षा के हालात गंभीर हैं और अंतरराष्ट्रीय सैनिकों को अफ़गान सुरक्षाबलों को मदद करने की ज़रूरत है.

सबसे हिंसक वर्ष

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संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अफ़गानिस्तान के लिए 2014 सबसे अधिक हिंसक वाला साल बनने जा रहा है. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, वर्ष 2008 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि हताहत नागरिकों की संख्या 10,000 तक पहुंच सकती है.

अंतरराष्ट्रीय संस्था के अनुसार, इसमें अधिकांश मौतें तालिबान हमलों के कारण हुईं.

तालिबान

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यह साल अफ़गान सुरक्षा बलों के लिए भी बहुत घातक रहा है. क़रीब 5,000 सुरक्षबलों की अभी तक मौत हो चुकी है.

हालांकि नैटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टोटेनब्ग ने कहा है कि अफ़गानिस्तान के 3,50,000 सुरक्षाबल स्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं.

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