मुशर्रफ़ पर हमले के दोषी को फांसी

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पाकिस्तान की पेशावर जेल में बुधवार सुबह पूर्व सैनिक नियाज़ मोहम्मद को फांसी दे दी गई है.

उन्हें पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर हमले में शामिल में होने का दोषी पाया गया था. वो पाकिस्तानी वायुसेना में जूनियर तकनीशियन थे.

उन्हें 14 दिसंबर 2003 में रावलपिंडी के चिचि पुल को विस्फोट से उड़ाकर राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर हमला करने के आरोप में सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी.

अंतिम मुलाक़ात

सरकारी मीडिया के मुताबिक़ उन्हें बुधवार सुबह फांसी दी गई. उन्हें हरिपुर जेल से पेशावर जेल लाया गया था.

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जेल अधिकारियों के मुताबिक़ मंगलवार शाम उनके परिजनों ने उनसे अंतिम मुलाकात की थी.

इस मामले में उनके साथ एक नागरिक मुश्ताक अहमद के अलावा वायुसेना के तीन अन्य अधिकारियों को भी फांसी की सजा सुनाई गई थी.

हज़ारों को फांसी की सज़ा

जिन तीन अधिकारियों को मुशर्रफ़ पर हमले के मामले में सज़ा सुनाई गई वे हैं - मुख्य तकनीशियन खालिद महमूद, तकनीशियन नवाज़श अली और जूनियर तकनीशियन अदनान रशीद.

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इन लोगों को तालिबान ने अप्रैल 2012 में बन्नू जेल पर हमला कर छुड़ा लिया था.

इस मामले के एक अन्य दोषी अधिकारी इस्लाम उद्दीन शेख उर्फ अब्दुस सिद्दीकी को 20 अगस्त 2005 को मुल्तान की सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई थी.

पाकिस्तान की जेलों में इस समय फांसी की सजा पाने वाले 8000 से अधिक लोग बंद हैं.

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पाकिस्तान की अदालतों ने अब तक आतंक विरोधी कानून के तहत क़रीब एक हज़ार मामलों में फांसी की सज़ा सुनाई है.

पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर 16 दिसंबर को हुए हमले के बाद सरकार ने फांसी की सजा की तामील पर लगी रोक हटा ली थी.

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