चौंकाने वाले 5 दुस्साहसी अंतरिक्ष मिशन

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हम धूमकेतु पर पहुँच गए हैं- अब अगला पड़ाव क्या?

ओरायन का टेस्ट लांच उस सफ़र की पहली कड़ी थी जिसके तहत शायद अंतरिक्ष यात्री भी मंगल पर जा सकेंगे.

लगभग एक लाख़ 35 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से घूम रहे धूमकेतु पर फ़िलाई लैंडर के उतरने की घटना को अंतरिक्ष की खोज में नया अध्याय माना जा रहा है.

इससे जो आंकड़े जुटाए गए हैं उनका अध्ययन कर किसी नतीजे पर पहुंचने में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन इस बीच, अंतरिक्ष विज्ञानी सवाल पूछ रहे हैं- अब आगे क्या?

बीबीसी फ्यूचर पांच ऐसी महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष योजनाओं के बारे में बता रहा है, जिनका सपना अंतरिक्ष एजेंसियों ने देखा है.

इन योजनाओं पर डेविड रॉबसन

शुक्र ग्रह के बादलों पर तैरना

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शुक्र ग्रह को अक्सर पृथ्वी के जुड़वा ग्रह के रूप में जाना जाता है. इसका आकार पृथ्वी के बराबर है, लेकिन इसका वायुमंडल विषैला है और उसके आकाश से एसिड की बारिश होती है.

फिर भी, अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जेफ़्री लैंडिस और उनकी टीम शुक्र की कक्षा में अंतरिक्ष यात्री भेजने की संभावनाएं तलाश रही है ताकि शुक्र की सतह पर रिमोट कंट्रोल्ड रोवर्स उतारे जा सकें.

उनका मानना है कि शुक्र ग्रह के वायुमंडल के बाहरी सतह पर ज़हरीले बादलों के ऊपर मनुष्य गुब्बारों में भी रह सकता है.

शुक्र ग्रह पर हवा का दबाव और तापमान भी पृथ्वी के ही समान है- इसलिए गुब्बारे के अंदर की स्थितियां अनुकूल होंगी और गुब्बारा बिना किसी ईंधन के उड़ सकेगा.

टाइटन पर तैरना

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शनि ग्रह के सबसे बड़े उपग्रह टाइटन का मौसम कमोबेश पृथ्वी जैसा ही है- एक मुश्किल है और वह है इसके मीथेन के बादल. मीथेन के बादल बरसते हैं तो सतह पर झील और समंदर का निर्माण करते हैं.

टाइटन की इन झीलों और समंदर पर दो नावों को उतारने की योजना है. पहला अभियान नासा का है और दूसरा यूरोपियन प्लैनेटरी साइंस कांग्रेस का.

कहने की ज़रूरत नहीं है कि इस अभियान में मुश्किलें कई हैं. नासा ने फ़िलहाल अपने अभियान को रोक दिया है, जबकि यूरोपीय कांग्रेस का काम शुरुआती दौर में है.

यूरोपा की बर्फ़ के अंदर रेंगना

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यूरोपा बृहस्पति ग्रह का उपग्रह है. इंसान का लक्ष्य इसके बर्फ़ की सतह के भीतर के खज़ाने के बारे में पता लगाना है.

सौर मंडल से बहुत दूर होने के कारण यूरोपा तक बहुत कम ऊष्मा पहुँचती है, लेकिन वैज्ञानिकों को लगता है कि बर्फ़ की इस सतह के नीचे ज़रूर पानी का समंदर होगा.

इसी संभावना को देखते हुए अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा एक यान को यूरोपा पर उतारने की योजना बना रही है.

इस यान में परमाणु शक्ति से गर्मी पैदा करने वाला एक भाग होगा जो सतह की बर्फ को पिघलाकर यूरोपा में तब तक धंसता चला जाएगा जब तक कि वह या तो समुद्र में प्रवेश कर ले या फिर यह साबित कर दे कि ऐसा कोई समुद्र ही नहीं है.

अलास्का में इसी साल एक प्रोटोटाइप यान का प्रयोग किया गया जो बर्फ़ की आठ किलोमीटर मोटी सतह को काटने की ताक़त रखता है.

एस्टेरॉयड को पकड़ना

अगर धूमकेतु पर पहुंचना महत्वाकांक्षी था तो नासा का एस्टेरॉयड रिडायरेक्ट मिशन सबसे दुस्साहसी है.

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मिशन है, एस्टेरॉयड को पहचानना और उसे पकड़कर हमारे उपग्रह यानी चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करना.

फ़िलाई मिशन की तरह यह हमारे सौर मंडल के कुछ रहस्यों को सुलझाने में मदद करेगा और धरती की तरफ बढ़ रहे एस्टेरॉयड का रास्ता बदल सकेगा.

नासा का कहना है कि वह अभी छह ऐसे संभावित एस्टेरॉयड्स पर काम कर रहा है.

एस्टेरॉयड को कैसे पकड़ना है, इस बाबत अभी कुछ तय नहीं किया गया है.

नासा का कहना है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो अगले 15 वर्षों में अंतरिक्ष यात्री इसकी चट्टान पर खोज करते हुए दिखाई दे सकते हैं.

तारे की सैर

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बृहस्पति के उपग्रह या बहुत दूर के एस्टेरॉयड को छोड़ दीजिए. अल्फा सेंचुरी पर जाना कैसा रहेगा? हाल ही में पैदा हुए लोग शायद अपने जीते जी इसे हक़ीक़त बनता हुआ देख पाएँगे.

नासा और अमरीकी डिफेंस रिसर्च प्रोजेक्ट एजेंसी के संयुक्त प्रोजेक्ट 100 ईयर स्टारशिप का उद्देश्य अगले 100 साल में इंसान को किसी तारे की सैर कराना है.

हालाँकि अभी यह कल्पनाओं की बात लगती है, लेकिन नहीं भूलना चाहिए कि अब से 100 साल पहले चांद पर पहुंचना भी कल्पनाओं की ही बात रही होगी.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.

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