इस्लामिक स्टेटः सत्ता है पर राष्ट्र नहीं!

  • 9 जनवरी 2015
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इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जारी लड़ाई में बम वर्षक विमान और कमांडो दस्ते मोर्चे पर डंटे हुए हैं.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय फ़लक पर सबसे बड़ा सवाल ये उभर रहा है कि स्टेट या राष्ट्र आख़िर चीज़ क्या होती है.

दुनिया का हर राजनीतिज्ञ, हर जानकार और सभी विश्लेषक एक बात को लेकर स्पष्ट हैं कि इस्लामिक स्टेट कोई राष्ट्र नहीं है.

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उनके मुताबिक इस्लामिक स्टेट एक चरमपंथी संगठन है. किसी का सिर कलम करते हुए जारी किए गए वीडियो से यह साफ़ तौर पर दिखाई भी देता है.

उन्होंने गांव और शहर तबाह कर डाले. वे इस्लाम के बारे में उनके विचार से असहमति रखने वाले किसी भी शख़्स की जान लेने पर आमादा हैं.

उन्होंने इराक़ और सीरिया की ज़मीन पर कब्ज़ा कर रखा है.

इस बात का कोई सवाल ही नहीं है कि उन्हें संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता मिल जाए या कोई अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्था उन्हें स्वीकार कर ले.

राष्ट्र कैसे बनता है

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Image caption दुनिया के सबसे नए देश दक्षिणी सूडान के नेता सल्वा कीर संयुक्त राष्ट्र महासभा में.

संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता किसी भी देश के लिए ज़रूरी होती है.

उन्हें सुरक्षा परिषद के समर्थन की ज़रूरत होती है और फिर महासभा में दो तिहाई सदस्यों का भी भरोसा हासिल करना होता है.

अगर संयुक्त राष्ट्र की मान्यता पाने में कोई देश नाकाम भी हो जाता है तो इसके लिए इच्छुक देश जहां तक मुमकिन हो सके, अन्य देशों की मान्यता ले सकता है.

और अगर उसके कुछ दोस्त बन जाते हैं तो वह उनके साथ कारोबारी सौदे कर सकता है, इसके बाद राजनीतिक मान्यता की बारी आती है और ये भी हो सकता है कि शायद इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़े.

अलग हालात

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Image caption ब्रिटेन ने इराक़ में किए गए हवाई हमलों में भाग लिया है, उसकी ओर से जारी की गई ये तस्वीर.

इराक़ की मौजूदा सरकार ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में मदद देने की औपचारिक अपील की है.

इससे इराक़ में ही इस्लामिक स्टेट के खिलाफ़ बमबारी करने का मज़बूत मामला बनता है.

लेकिन सीरिया के मामले में हालात अलग हैं. बशर अल असद सीरिया के राष्ट्रपति पद पर बने हुए हैं और सीरिया अभी भी एक संप्रभु राष्ट्र है.

असद ने न किसी तरह की मदद मांगी है और न ही हवाई हमलों को अपनी सहमति दी है. एक पूर्ण राष्ट्र के लिए सीरिया हर ज़रूरी शर्त पूरी करता है.

आईएस के खिलाफ

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लेकिन अमरीका और उसके सहयोगी बशर अल असद की सरकार की वैधता को मान्यता नहीं देते हैं.

सीरिया की संप्रभुता को कुचलने के लिए इतना काफी है, अगर ऐसा होता है तो इसका व्यवहारिक तौर पर ये मतलब होगा कि सीरिया ने एक राष्ट्र की अपनी हैसियत खो दी है.

ब्रिटेन समेत पश्चिमी यूरोप के देशों ने सीरिया में चरमपंथी ठिकानों को निशाना बनाकर की जाने वाली बमबारी में हिस्सा नहीं लिया है.

हालांकि वे इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ रहे अमरीकी गठबंधन का हिस्सा हैं. इसे कहानी के लिहाज़ से देखें तो एक राष्ट्र की तीन अलग अलग संकल्पनाएं हैं.

संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता

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पहला मामला सीरिया का है जो संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है, उसकी सरहदें हैं, अपने भूभाग पर उसका आंशिक नियंत्रण है, पश्चिमी जगत में नापसंद की जाने वाली सरकार है, हक़ीकत में कहें तो उसे अपने क्षेत्र की सुरक्षा का कोई अधिकार नहीं है.

दूसरा उदाहरण इराक़ का है जहां सीरिया के उलट पश्चिम के समर्थन वाली सरकार है.

तीसरा मामला इस्लामिक स्टेट का है जिसने एकतरफ़ा तरीके से अपनी खिलाफ़त की घोषणा कर रखी है, उसके पास संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता नहीं है, कोई निर्धारित सीमा नहीं है.

लेकिन सीरिया और इराक़ की तरह ही उसे ज़मीन का आंशिक नियंत्रण हासिल है, एक सरकार है पर बिना किसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता के और उसे अपने क्षेत्र की सुरक्षा का भी अधिकार नहीं है.

कुछ उदाहरण

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Image caption कोसोवो, फलीस्तीनी क्षेत्र, अबकाज़िया और सोमालिया के झंडे.

इस्लामिक स्टेट को अन्य देशों को कोई समर्थन नहीं है लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है कि राष्ट्र की कोई सर्वमान्य परिभाषा भी नहीं है.

आप ये सवाल कि 'राष्ट्र क्या है?' किसी राजनेता से या वकील से या फिर किसी समाजशास्त्री से या किसी अर्थशास्त्री से पूछें, आपको चार अलग अलग जवाब मिलेंगे.

यहां कोसोवो, फ़लस्तीनी क्षेत्र या सोमालिया का उदाहरण लिया जा सकता है.

जहां कोसोवो 2008 में ही सर्बिया से आज़ाद हो गया था लेकिन उसकी संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता की राह में रूस ने रोड़ा लगा रखा है.

फ़लस्तीन का मामला

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फ़लस्तीनी क्षेत्र की संयुक्त राष्ट्र में गैर सदस्य ऑब्ज़र्वर देश की हैसियत है.

उसे 100 से अधिक देश मान्यता दे चुके हैं लेकिन सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों ने उसे मान्यता नहीं दी है.

सोमालिया संयुक्त राष्ट्र का एक पूर्ण सदस्य है. उसे दुनिया के दूसरे देशों की पूर्ण मान्यता है लेकिन कोई केंद्रीय सरकार नहीं है.

उसके कई क्षेत्रों ने अपनी आजादी घोषित कर रखी है.

राज्य की परिभाषा

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Image caption संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी.

1930 के मॉन्टेवीडियो कन्वेंशन में राष्ट्र के लिए चार जरूरी चीजें बताई गई थीं, आबादी, स्पष्ट सीमा, सरकार, अन्य देशों के साथ संबंध बनाने की क्षमता.

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इस कन्वेंशन में ऐसा कुछ नहीं है जो इस्लामिक स्टेट को मान्यता दिए जाने पर रोक लगाता है. उत्तर कोरिया का उदाहरण लिया जा सकता है जहां के अंदरूनी हालात पर चिंता व्यक्त की जाती रही है.

ताइवान का मामला है जिसे संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल नहीं है लेकिन वह दशकों से देश की तरह अस्तित्व में है.

इस्लामिक स्टेट के खिलाफ चल रही लड़ाई खून खराबे से जितनी भरी हुई है, उसके अस्तित्व को लेकर जारी विचारों की जंग उतनी ही शिष्ट है. इस बहस के नतीज़े आने में पीढ़िया लगेंगी.

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