पेरिस हमला: 'मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रतिक्रिया संभव'

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पेरिस में पत्रिका 'शार्ली एब्डो' पर हमले के बाद माहौल बहुत भावुक हो गया है. बहुत सारे वरिष्ठ राजनेता हमले की निंदा कर रहे हैं.

इस बारे में पूर्व राष्ट्रपति निकोला सर्कोज़ी का भी बयान आया है. वर्तमान राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि 'बेशक यह आतंकवादी हमला है'.

पेरिस से पत्रकार वैजू नरावने ने बीबीसी के रेडियो कार्यक्रम दिन भर में वहां के ताज़ा हालात की जानकारी दी.

पत्रकार वैजू की ज़ुबानी ताज़ा हालात

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मैं अक्सर एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में बतौर मेहमान हिस्सा लेती हूं. उसमें यह कार्टूनिस्ट भी शामिल होते थे और राजनीतिक चर्चाओं के बीच वह 'लाइव कार्टूनिंग' करते थे.

मैं कार्टूनिस्ट शर्ब को बहुत अच्छी तरह जानती थी. मैं वॉलिंस्की भी को बहुत अच्छी तरह जानती थी. चरमपंथियों ने फ़्रांस के चार बहुत अच्छे कार्टूनिस्टों को मार डाला है.

आम लोग कह रहे हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ऐसी चीज़ें फ़्रांस जैसे लोकतंत्र में क्यों हो रही हैं.

जो धुर दक्षिणपंथी पार्टी है उसके सदस्यों ने कहना शुरू कर दिया है कि यह सब रूढ़िवादी इस्लाम की वजह से हो रहा है और फ़्रांस में हमें इसे नहीं रहने देना चाहिए.

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Image caption (हमले में मारे गए कॉर्टूनिस्ट-क्लॉकवाइज़) ज्यां काबू, वॉल्सिंगी पोसिंग, शर्ब, टिग्नू

ऐसा भी हो सकता है कि इसके बाद मुसलमानों के ख़िलाफ़ पलटवार हो क्योंकि फ़्रांस में यूरोप की सबसे बड़ी क़रीब 50 लाख मुसलमान आबादी रहती है.

यहां पहले ही अप्रावासियों के ख़िलाफ़ भावनाएं भड़की हुई हैं क्योंकि आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और लोग कहते हैं कि अप्रावासियों को फ़्रांस से चले जाना चाहिए.

एक तथ्य यह भी है कि इराक़ और सीरिया में जो यूरोपीय जिहादी लड़ने गए हैं उनमें सबसे ज़्यादा फ़्रांस के हैं.

(बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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