शार्ली एब्डो हमले से इस्लाम विरोध बढ़ेगा?

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Image caption फ्रांस के उपनगरों में असंतोष उपज रहा है.

'बानल्यू' का शाब्दिक अर्थ होता है उपनगर, लेकिन समकालीन फ्रांस की राजनीतिक शब्दावली में इसका अर्थ इससे कहीं अधिक होता है.

अधिकांश फ्रांसीसियों के लिए यह अप्रवासन और सार्वजनिक जीवन में इस्लाम की मौजूदगी को लेकर देश की सबसे तीखी बहस का पर्याय बन चुका है.

'शार्ली एब्डो' हमलों के मद्देनज़र आम फ्रांसीसियों में गहरी नाराज़गी व्याप्त है.

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लेकिन इसने मुस्लिमों और शेष समाज के बीच कोई ध्रुवीकरण पैदा नहीं किया है. कम से कम अभी तक तो नहीं.

मुख्यधारा के राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने एक समूह के रूप में मुस्लिमों को धार्मिक कट्टरपंथियों से अलग करने में फुर्ती दिखाई है.

लेकिन एक आशंका मौजूद है कि हिंसा समुदायों के बीच संदेह को और बढ़ा सकती है.

जेनेविलियर्स के उत्तरी भाग में स्थित पर्सियन बैनल्यू के रहने वाले एरिक बैडे के लिए उनका मित्रवत पड़ोसी चरमपंथी बन गया है.

पड़ोसियों पर संदेह

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शार्ली एब्डो हमले के एक संदिग्ध शरीफ़ क्वाशी के घर के ठीक सामने ही वह रहते हैं. क्वाशी को बैडे एक शांत, गंभीर और साधारण तरीक़े से रहने वाले व्यक्ति के रूप में याद करते हैं.

उन्होंने उसे तीन दिन पहले देखा था.

वह कहते हैं, "वह बहुत अच्छे, मिलनसार और साफ़ सुथरे व्यक्ति थे. शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए उनमें काफ़ी हमदर्दी थी. मैं उनसे यहां रोज़ाना मिलता था. आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि वह ऐसा कुछ कर गुज़रेंगे."

यहां से महज़ 100 गज़ आगे एक बेकरी में (जिसके मालिक मुसलमान हैं) मुझे एक महिला ने बताया कि अब उसे डर लगता है, "ये लोग यहीं के हैं, इसलिए मैं डरी हुई हूं."

उनके लिए इस हमले से फ्रांस में उनके परिवार के लिए ख़तरा पैदा हो गया है.

इस्लाम का भय?

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वह कहती हैं, "क्योंकि हमारे पास बच्चे हैं, इसलिए हम हर बात के लिए डरे हुए हैं. हर कोई हमारी ओर देख रहा है, मानो हमने ही यह किया है. हर कोई कहता है कि आप अरब के हो, आप मुस्लिम हो."

हालांकि मुस्लिमों की सम्पत्तियों पर इक्के-दुक्के हमले होते रहे हैं, लेकिन अधिकांश फ्रांसीसी राष्ट्रीय एकता की अपील कर सावधानी बरत रहे हैं.

पेरिस में स्थित मुख्य मस्जिद पर सर्वधर्म एकता वाली अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई दी. इसमें बौद्ध, यहूदी और इसाई धार्मिक नेताओं ने हमले में मारे गए लोगों की याद में मुस्लिमों के साथ एक मिनट का मौन रखा.

फ्रांस के प्रोटेस्टेंट चर्च के प्रवक्ता फ्रांसुआ क्लैवाइरोली से जब मैंने पूछा कि क्या अब लोगों को इस्लाम का भय अधिक सताने लगा है, उनकी प्रतिक्रिया ठोस थी.

उन्होंने कहा, "हम यहां यह कहने के लिए इकठ्ठा हुए हैं कि इस गणराज्य में इस्लाम की अपनी पूरी आज़ादी है और इसे हम एकसाथ एकमत से कहते हैं."

सरकार पर दबाव

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लेकिन एकता की तमाम अपीलों और नागरिकों की ओर से एकजुटता की वास्तविक इच्छा के बावजूद इस्लामी कट्टरता से मुक़ाबला करने के लिए सरकार पर बहुत दबाव है.

नेशनल काउंसिल ऑफ़ डेमोक्रेटिक मुस्लिम के नेता अब्दु्र्रहमान दाहमेन जैसे धार्मिक नेताओं का कहना है कि इस समस्या से निपटने का असल तरीक़ा है अलग-थलग पड़े नौजवानों के बीच कट्टरपंथी इस्लाम की अपीलों को कुंद किया जाए.

वह कहते हैं, "हमें ऐसे नौजवानों के प्रति बहुत ही सावधान रहने की ज़रूरत है. चरमपंथी संगठनों के सदस्यों द्वारा उन्हें तैयार किया जाता है. ये लोग, जिन्होंने लोकतांत्रिक और गणराज्य के मूल्यों को हमारे स्कूलों से सीखा है, उन्हें इस तरह का अपराध नहीं करना चाहिए."

बेरोज़गारी

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Image caption आशंका है कि कहीं ये हमले फ्रांसीसी समाज की सहिष्णुता पर असर न डालें.

एक दशक पहले हुए दंगों के बाद सरकार द्वारा भारी निवेश किए जाने के बावजूद मुस्लिम नौजवानों में अलगाव के लिए बैनल्यूवासी सुर्खियों में रहे हैं.

अधिकांश इलाक़ों में 15 से 24 वर्ष के युवाओं के बीच बेरोज़गारी की दर 40 प्रतिशत है. यह राष्ट्रीय औसत का चार गुना है. लेकिन, आर्थिक संकट के मुक़ाबले अलगाव कहीं ज़्यादा चिंता का विषय है.

ऐसा माना जा रहा है कि फ़िलहाल राज्य के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है वह सुरक्षा नहीं है, बल्कि पहचान का संकट है.

ऐसे नौजवान, जो ख़ुद को फ्रांसीसी समाज का हिस्सा नहीं महसूस करते हैं और जो कट्टरपंथियों के झांसे में आ जाते हैं, उन नौजवानों को यह समझाने की ज़रूरत है कि उन्हें गणराज्य के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए.

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