'लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई'

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अमरीका का सबसे लंबा युद्ध लगभग ख़त्म हो रहा है और कुछ युवा फ़ौजी अपने आख़िरी अभियान पर जा रहे हैं.

वे अफ़ग़ानिस्तान लौटे हैं अपने इलाज के लिए. साथ ही अपनी आपबीती दूसरों को सुनाने के लिए.

इन मुस्कुराहटों और तालियों के पीछे एक दुखदायी सच्चाई छिपी है. दूर, उनके अपने देश में हर दिन 22 रिटायर्ड सैनिक आत्महत्याएं कर रहे हैं.

अमरीकी मरीन कोर के कैप्टन जॉन अर्कहार्ट इराक़ में तैनात थे, जहां वे घायल हुए. मगर दूसरे कई सैनिकों की तरह उनकी असल कठिनाई फ़ौज छोड़ने के बाद शुरू हुई.

डरावनी तस्वीरें

अर्कहार्ट का कहना है, “पिछली घटनाएं याद आने लगीं, वे लाशें दिखने लगीं, जिन्हें मैंने उठाया था. वो डरावनी तस्वीरें दिखाई देती थीं.”

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अक्सर लड़ाई से लौटनेवाले पूर्व सैनिकों को बेरोज़गारी, बेघर होने और नशे की लत जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है.

पूर्व सैनिक बेन डेलिंगर की टांग इराक़ में एक आईईडी विस्फोट में चली गई. मगर दूसरे कई पूर्व सैनिकों की तरह उन्हें भी असल दुःख अपंगता का नहीं है.

उनका कहना है,“उसके बाद मेरा तलाक़ हो गया. दो बच्चे हैं जिनसे मैं शायद ही कभी मिल पाता हूं. अब लगता है कि पहले मदद मिली होती, तो शायद ज़िंदगी अलग होती.”

सार्जेंट एडी राइट इराक़ी शहर फ़लूजा में घायल हुए, जिसे अमरीकी सेना ने मुश्किल से जीता था. वहां आज दोबारा इस्लामी चरमपंथियों का क़ब्ज़ा है.

अमरीका ने जैसे इराक़ में लड़ाई ख़त्म करने की कोशिश की, वैसे ही वह इस बार अफ़ग़ानिस्तान में करने की कोशिश कर रहा है.

अधूरा ऑपरेशन

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मगर कई के लिए अफ़ग़ानिस्तान ऑपरेशन अभी अधूरा है. इस रिपोर्ट को तैयार करने के दौरान ही तालिबान ने अमरीकी अड्डे की जेल पर रॉकेट बरसाए, जिसमें 40 बंदी घायल हुए.

पूर्व सैनिकों के मुताबिक़ ऐसे हमले याद दिलाते हैं कि लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई.

सार्जेंट एडी राइट कहते हैं,“लग रहा है इराक़ में वह सब आईएस के हाथ सौंप दिया गया है, जो हमने हासिल किया था. मुझे समझ नहीं आता कि हम कर क्या रहे हैं. वो कौन लोग हैं जो ऐसे फ़ैसले कर रहे हैं.”

कुछ दिन मोर्चे पर बिताकर ये पूर्व सैनिक वापस घर लौट जाते हैं, जहां पिछले कई साल से ये सामान्य ज़िंदगी बिताने की लड़ाई लड़ रहे हैं.

मगर ये संघर्ष ऐसा है जिसकी टीस कम तो होती है, ख़त्म नहीं होती.

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