फ़ेसबुक कहे 'मैं हूं आईना तेरा'

  • 13 जनवरी 2015
फेसबुक लाईक्स

इंसान की नब्ज़ पहचानने में कंप्यूटर दोस्तों और परिजनों से ज़्यादा तेज़ हो सकता है.

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एक टीम ने हज़ारों लोगों पर किए गए अध्ययन के बाद ये पता लगाया है.

अध्ययन में शामिल डॉक्टर यूयू वू और उनके सहयोगियों ने ख़ास कंप्यूटर सिस्टम की मदद से 70,520 फ़ेसबुक यूज़र्स से जानकारी इकट्ठी की.

वैसे तो कैम्ब्रिज और स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता पहले ही बता चुके हैं कि फ़ेसबुक 'लाइक्स' से व्यक्ति की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं, यौन रुझानों जैसी बेहद निजी बातों का पता चलता है.

फ़ेसबुक 'लाईक्स'

Image caption फेसबुक के लाईक्स यौन रुझानों और राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के संकेत देते हैं.

मौजूदा अध्ययन में इससे भी एक क़दम आगे जाकर ये पता लगाने की कोशिश की गई है कि इंसान का चरित्र और व्यक्तित्व पहचानने में कौन आगे है, इंसान के क़रीबी दोस्त रिश्तेदार या मशीन?

इसके लिए अध्ययनकर्ताओं ने फ़ेसबुक 'लाइक्स' के आधार पर कंप्यूटर का एक मॉडल तैयार किया जिसने इंसान की शख़्सियत के पांच ज़रूरी पहलुओं को खंगाल कर बताया कि वह भाई, बहन और कई जीवनसाथी से भी ज़्यादा जानकारी रखता है.

इन पांच ज़रूरी पहलू में लोकप्रियता, सच्चाई, खुलापन, तंत्रिका तंत्र और सामाजिकता है.

डिजिटल फ़ुटप्रिंट

अमरीका की जानी मानी शोध पत्रिका 'प्रोसिडिंग ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज़' यानी 'पीएनएएस' में छपी रिपोर्ट के अनुसार 'डॉक्टर हू' के फ़ेसबुक फ़ैन्स शर्मीले पाए गए जबकि 'बिग ब्रदर' के प्रशंसक रूढ़िवादी विचार के.

कैम्ब्रिज विश्वविद्याल में पीएचडी स्टूडेंट और फ़ेसबुक में विज़िटिंग इंटर्न डॉ वू का मानना है कि आजकल लोग ऑनलाइन समय ज़्यादा बिताने लगे हैं जिससे कंप्यूटर को ये सहूलियत मिल गई है.

मनोविज्ञानी एलन रेडमैन का कहना है कि विज्ञापन कंपनियां हमारे बारे में जानने के लिए हमारे डिजिटल फ़ुटप्रिंट का इस्तेमाल कर रही हैं.

यही नहीं, नौकरी देने के पहले कंपनियां योग्य उम्मीदवार का पता लगाने के लिए लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट खंगालने लगी हैं.

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