फ्रांस में शार्ली एब्डो के लिए लंबी लाइनें

  • 14 जनवरी 2015
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फ़्रांस में न्यूज़ स्टैंड्स के बाहर शार्ली एब्डो के ताज़ा संस्करण के लिए लंबी लाइनें लगी हुई हैं.

फ़्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका के दफ़्तर पर हुए हमले में 12 लोगों और पेरिस में अन्य हमलों में पांच लोगों के मारे जाने के बाद आ रहे पत्रिका के इस अंक की 50 लाख प्रतियां छापी जा रही हैं.

पत्रिका के कवर पेज पर पैग़म्बर को अपने हाथों में 'मैं शार्ली हूं' की तख़्ती लिए रोते हुए दिखाया गया है.

'आईएस, अल-क़ायदा साथ!'

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Image caption कई जगह पत्रिका का ताज़ा अंक ख़त्म हो गया.

पहले ताज़ा अंक की 30 लाख प्रतियां छापी गई थीं. लेकिन फ्रांस में बुधवार की सुबह यह तेज़ी से बिक गईं जिसके बाद संपादकों ने इनकी संख्या बढ़ाकर 50 लाख करने का फ़ैसला किया.

सामान्यतः हर हफ़्ते शार्ली एब्डो की सिर्फ़ 60,000 प्रतियां ही छापी जाती थीं.

पत्रकारों के अनुसार पत्रिका के इस अंक, जिसे 'सर्वाइवर्स इश्यू' (बचने वालों का अंक) कहा जा रहा है, की मांग इसलिए बहुत ज़्यादा है, क्योंकि इससे मिलने वाला पैसा हमले में मरने वालों के परिजनों को दिया जाएगा.

पेरिस में बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस के अनुसार शार्ली एब्डो के पैग़म्बर का कार्टून छापने के फ़ैसले के बाद चरमपंथी इस्लामिक वेबसाइटों पर धमकियां दी जा चुकी हैं और मुस्लिम जगत में इसकी निंदा हो रही है.

'मूर्खतापूर्ण काम'

इस्लामिक स्टेट चरमपंथी समूह ने अपने रेडियो स्टेशन से कहा कि कार्टून प्रकाशित करना 'एक बेहद मूर्खतापूर्ण काम' है.

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इस दौरान यमन में अल-क़ायदा (एक्यूएपी) की ओर से जारी एक वीडियो को बुधवार को जारी किया गया जिसमें चरमपंथी समूह ने पिछले हफ़्ते पत्रिका पर हुए हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

सुपर मार्केट पर हमला करने वाले बंदूक़धारी अमैडी कॉलिबाली ने एक वीडियो संदेश में आईएस के प्रति निष्ठा स्वीकार की थी, जबकि शार्ली एब्डो पर हमला करने वाले हमलावरों और शेरिफ़ कोपुआची ने कहा था कि वह एक्यूएपी के लिए काम कर रहे थे.

कॉलिबाली का यह भी कहना था कि उन्होंने इन हमलों को साथ मिलकर किया था, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में विरोधी आईएस और एक्यूएपी साथ मिलकर कोई हमला करेंगे, इसकी संभावना बहुत कम है.

लोगों का शुक्रिया

यह अंक छह भाषाओं में उपलब्ध होगा जिसमें अंग्रेज़ी, अरबी और तुर्की शामिल हैं. इनमें से कुछ प्रिंट और कुछ ऑनलाइन उपलब्ध होंगे.

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शार्ली एब्डो के प्रमुख संपादक गेरार्ड बियार्ड ने पत्रकारों से कहा, "हमें इसे पूरा करके बहुत अच्छा लगा और हमें बहुत ख़ुशी है. मुखपृष्ठ तैयार करना बहुत जटिल था, क्योंकि इसमें कुछ नया दिखना चाहिए था. इसे उस घटना से संबंधित होना चाहिए था, जिसे हमने झेला है."

संपादकीय में पत्रिका ने उन लाखों लोगों को धन्यवाद दिया है जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में ख़ुद को शार्ली घोषित किया था.

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